क्या है हरि वासर? Nirjala Ekadashi Vrat का फल चाहिए तो जान लें पारण का यह Secret नियम

By दिव्यांशी भदौरिया | Jun 24, 2026

सनातन धर्म में एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। पूरे साल में 24 एकादशियां पड़ती है, लेकिन इन सभी एकादशियों में ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष में आने वाली निर्जला एकादशी का विशेष महत्व है। इस व्रत में अन्न-जल का त्याग कर दिया जाता है। यह व्रत अधिक श्रेष्ठ पवित्र और फलदायी माना जाता है।

खासतौर पर व्रत का पारण न करने से साधक का व्रत सफल नहीं होता है। इसलिए अगले दिन यानी द्वादशी तिथि के दिन व्रत का पारण करना चाहिए। जब पारण करें तो हरि वासर की अवधि का विशेष ध्यान रखें। हरि वासर के समय व्रत का पारण करना पूरी तरह वर्जित है। ऐसे में आप भी सोच रहे होंगे कि आखिर क्या है हरि वासर? तो चलिए बिना देर किए, आपको इस बारे में बताते हैं-

क्या है हरि वासर?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, द्वादशी तिथि के शुरुआती भाग को हरिवासर कहा जाता है। इस समय एकादशी व्रत का पारण करना शुभ नहीं माना जाता। आसान भाषा में समझें तो यदि द्वादशी तिथि 24 घंटे की है, तो उसके पहले लगभग 6 घंटे हरिवासर कहलाते हैं। इसलिए इस अवधि के समाप्त होने के बाद ही एकादशी व्रत का पारण करना चाहिए।

पारण में क्यों रखा जाता है हरि वास का ध्यान?

गौरतलब है कि निर्जला एकादशी का व्रत रखना बेहद कठिन होता है। इतना कठिन होता है कि व्रत का पारण करते समय हरि वास का ध्यान नहीं दिया, तो व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता। माना जाता है कि हरि वासर के समय व्रत का पारण करने से व्रत निष्फल हो जाता है। इसलिए कहा जाता है कि एकादशी व्रत करने से पहले इससे जुड़े नियम के बारे में जरुर जान लीजिए।

निर्जला एकादशी में पानी कब पीना चाहिए?

निर्जला एकादशी व्रत में पानी पीना का सही समय व्रत के पारण के समय ही होता है। एकादशी तिथि की शुरुआत से लेकर द्वादशी तक सूर्योदय तक पानी नहीं पीना चाहिए।

कब है निर्जला एकादशी?

ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत- 24 जून को शाम 06 बजकर 12 मिनट पर

ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का समापन- 25 जून को रात 08 बजकर 09 मिनट पर

निर्जला एकादशी 2026 व्रत पारण 

निर्जला एकादशी व्रत का पारण करने का समय- 26 जून को सुबह 05 बजकर 25 मिनट से 08 बजकर 13 मिनट तक

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