JDU में शामिल होते ही Nishant Kumar का पहला बयान, 'पिता Nitish Kumar के मार्गदर्शन में करूंगा काम'

By Ankit Jaiswal | Mar 08, 2026

बिहार की राजनीति में एक नई हलचल देखने को मिली है। लंबे समय तक सार्वजनिक जीवन से दूर रहे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार ने रविवार को आधिकारिक रूप से जनता दल यूनाइटेड की सदस्यता ग्रहण कर ली है। मौजूद जानकारी के अनुसार पटना स्थित पार्टी मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई गई है।

गौरतलब है कि निशांत कुमार इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुके हैं और उनकी उम्र लगभग चालीस वर्ष के आसपास बताई जा रही है। अब तक वह राजनीति और सार्वजनिक गतिविधियों से काफी दूरी बनाए हुए थे। ऐसे में उनकी औपचारिक राजनीतिक शुरुआत को बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

मौजूद जानकारी के अनुसार उनका पार्टी में शामिल होना ऐसे समय में हुआ है जब हाल ही में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा के लिए अपना नामांकन दाखिल किया है। इसी वजह से राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज हो गई है कि आने वाले समय में पार्टी के भीतर नई पीढ़ी को ज्यादा जिम्मेदारी दी जा सकती है।

पार्टी कार्यालय पहुंचने पर कार्यकर्ताओं ने उनका जोरदार स्वागत किया और कई नारे भी लगाए। कार्यकर्ताओं ने युवा सोच और मजबूत संकल्प जैसे नारे लगाकर उम्मीद जताई कि उनकी एंट्री से पार्टी में युवाओं से जुड़े मुद्दों पर अधिक ध्यान दिया जा सकेगा।

पार्टी की सदस्यता लेने के बाद निशांत कुमार ने कार्यकर्ताओं को संबोधित भी किया है। उन्होंने पार्टी नेतृत्व और समर्थकों का धन्यवाद देते हुए कहा कि उन्हें जो विश्वास दिया गया है, उस पर खरा उतरने की कोशिश करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले करीब बीस वर्षों में उनके पिता ने बिहार के विकास के लिए जो काम किए हैं, उस पर पूरे बिहार और देश को गर्व है।

निशांत कुमार ने यह भी कहा कि राज्य के लोग मुख्यमंत्री के योगदान को कभी नहीं भूलेंगे। साथ ही उन्होंने अपने पिता के राज्यसभा जाने के फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि यह उनका निर्णय है और वे उसका सम्मान करते हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि आगे भी वे अपने पिता के मार्गदर्शन में काम करते रहेंगे।

हालांकि इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मौजूद नहीं थे, लेकिन निशांत कुमार का पार्टी में शामिल होना जनता दल यूनाइटेड के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम पार्टी में संभावित नेतृत्व परिवर्तन की शुरुआत भी हो सकता है और आने वाले समय में पार्टी की रणनीति में नई पीढ़ी की भूमिका बढ़ सकती है।

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