By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Jul 07, 2026
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मंगलवार को एथनॉल मिश्रित पेट्रोल के आलोचकों को चुनौती देते हुए कहा कि वे ऐसी एक भी कार का नाम बताएं जिसमें इस ईंधन के कारण कोई समस्या आई हो। ई20 पेट्रोल यानी 20 प्रतिशत एथनॉल-मिश्रित ईंधन बिक्री की अनिवार्यता को लेकर आलोचना और गाड़ियों की माइलेज कम होने की शिकायतों के बीच उन्होंने यह बात कही। गडकरी ने यहां ‘विकसित भारत’ सम्मेलन को संबोधित करते कहा कि जीवाश्म ईंधन (कोयला, पेट्रोल आदि) पर भारत की निर्भरता एक आर्थिक बोझ है।
भारत ने पहले ही 20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रित पेट्रोल का लक्ष्य हासिल कर लिया है। इससे आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम हुई है और कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आई है। एथनॉल गन्ना, मक्का या चावल जैसे बायोमास से बनता है। भारत में वाहन मालिकों के पास पेट्रोल पंप पर अलग-अलग तरह के ईंधन चुनने का विकल्प नहीं होता, जबकि ब्राजील में ग्राहकों को अलग-अलग कीमतों वाले ईंधन चुनने का विकल्प मिलता है। ब्राजील के कानून के तहत, अधिक एथनॉल वाले मिश्रण के लिए कीमत में छूट देनी होती है।
इस आरोप पर कि उनके परिवार के सदस्यों की कंपनियां एथनॉल बनाने के काम में शामिल हैं और इसीलिए वह अधिक एथनॉल वाले पेट्रोल को लाने पर जोर दे रहे हैं, केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उनके परिवार के सदस्यों की चीनी मिलें हैं और उनकी कंपनियां एथनॉल उत्पादन पर निर्भर नहीं हैं। उन्होंने कहा कि देश में एथनॉल की अधिकता है इसलिए मक्के से एथनॉल बनाने के कदम से उत्तर प्रदेश और बिहार के किसानों को 45,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय हुई है।
गडकरी ने कहा, ‘‘जब हमने मक्के से एथनॉल बनाने का फैसला किया, तो मक्के की बाजार कीमत 1,200 रुपये प्रति क्विंटल थी और न्यूनतम समर्थन मूल्य 1,800 रुपये प्रति क्विंटल था। इस फैसले के बाद, मक्के की कीमत बढ़कर 2,800 रुपये प्रति क्विंटल हो गई।’’ उन्होंने कहा, ‘‘उत्तर प्रदेश और बिहार के किसानों की जेब में अतिरिक्त 45,000 करोड़ रुपये आए।’’
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने अधिक एथनॉल मिश्रित और वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल का दायरा बढ़ाने के लिए वाहन उत्सर्जन नियमों में बदलाव का प्रस्ताव किया है ताकि सभी तरह के वाहनों के लिए ‘फ्लेक्स-फ्यूल’ और पूरी तरह से जैव ईंधन से चलने वाले वाहनों का रास्ता साफ हो सके। केंद्रीय मोटर वाहन नियम 1989 में प्रस्तावित बदलावों का मकसद ई85 (पेट्रोल के साथ 85 प्रतिशत एथनॉल) और ई100 (जिससे वाहन लगभग शुद्ध एथनॉल पर चल सकेंगे) जैसे ईंधनों के साथ-साथ बी100 बायो-डीजल और हाइड्रोजन-सीएनजी मिश्रण के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है।