कोरोना संकट से निपटने में जुटे नीतीश कुमार तो विपक्ष को जवाब दे रहे सुशील मोदी

By अंकित सिंह | May 01, 2020

पूरा देश इस वक्त कोरोना महामारी से जूझ रहा है। महामारी से बचने के लिए पूरे देश में लॉक डाउन है। लॉक डाउन के दौरान आर्थिक गतिविधियों के साथ-साथ शैक्षणिक गतिविधियां भी पूरी तरीके से ठप है। हालांकि अब धीरे-धीरे इन्हें शुरू करने की योजनाएं बनाई जा रही है। देश कोरोना महामारी से निपटने के लिए पूरी तरीके से तैयार है। केंद्र की सरकार के साथ-साथ प्रदेश की भी सरकारें अलग-अलग तरह से इस महामारी से निपट रही हैं। केंद्र सरकार के निर्देशों का पालन राज्य की सरकारें करवा रही हैं। राज्य की सरकारें केंद्र की ही दिशा निर्देश पर आगे की योजनाएं बना रही हैं। अगर बात बिहार की करें तो वहां भी लॉक डाउन लागू है। वर्तमान में देखे तो बिहार में कोरोना के लगभग के साढे 450 मामले सामने हैं जिनमें से दो संक्रमित लोगों की मौत हो गई है। बिहार में कोरोनावायरस मरीजों के स्वास्थ्य होने की तादाद भी अच्छी खासी है लेकिन फिर भी बिहार चर्चा का विषय बना हुआ है। दरअसल यह चर्चा बिहार के उन लोगों की वजह से है जो रोजी-रोटी की तलाश में राज्य से बाहर गए हुए हैं, अब वे राज्य में वापस आना चाहते हैं लेकिन लॉक डाउन और परिवहन व्यवस्था ठप होने के कारण उनकी वापसी फिलहाल मुश्किल नजर आ रही है। इन सबके बावजूद बिहार में कोरोनावायरस से लड़ने के लिए लगातार रणनीतियां बनाई जा रही हैं। स्वयं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कोरोना महामारी से उत्पन्न संकट पर बनाए हुए हैं। वह हर रोज अपने सरकारी आवास एक अणे मार्ग पर अधिकारियों के साथ-साथ मंत्रियों के साथ बैठक करते हैं, कोरोनावायरस ने के लिए रणनीति बनाते हैं और उसे कैसे अमल में लाया जाए इस पर भी जोर देते हैं। कोरोना महामारी के शुरुआत से ही नीतीश कुमार यह बैठक लगातार करते हैं जिसमें राज्य के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी, राज्य के मुख्य सचिव और स्वास्थ्य सचिव के अलावा स्वास्थ्य मंत्री और विभिन्न सरकारी अधिकारी मौजूद रहते हैं। नीतीश कुमार स्वयं सभी परिस्थितियों की निगरानी कर रहे हैं और उनके लिए दिशा-निर्देश भी बना रहे हैं जिस पर अधिकारी अमल कर रहे हैं। राज्य में अब तक कोरोनावायरस से निपटने के लिए जितनी भी रणनीतियां बनाई गई है उसमें नीतीश कुमार का रोल अहम रहा है। नीतीश कुमार समस्त जिला के स्वास्थ्य विभाग को भी दुरुस्त करने की कोशिश में जुटे हुए हैं। इस बीच उनके डिप्टी यानी कि उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी भी खूब सक्रिय नजर आते हैं। हालांकि नीतीश कुमार जहां एक ओर कोरोनावायरस से लड़ने के लिए रणनीति बनाने पर जोर जोर देते रहे तो वही उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी विपक्ष के आरोपों का जवाब देने में जुटे रहे। मतलब यह है कि नीतीश कुमार जहां काम पर लगे रहे तो सुशील मोदी विपक्ष को निपटाने में। तेजस्वी यादव हो या फिर पप्पू यादव या फिर शरद यादव या उपेंद्र कुशवाहा, विपक्ष के सभी बड़े नेताओं के आरोपों का जवाब सुशील मोदी ही सबसे पहले देते हैं। बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे पिछले साल चमकी बुखार के बाद से लगातार चर्चा में रहे हैं। कोरोना महामारी भी स्वास्थ्य संकट का सबसे बड़ा कारण है। ऐसे में एक राज्य के स्वास्थ्य मंत्री के नाते मंगल पांडे की जिम्मेदारियां बढ़ गई है। हालांकि सभी निर्णय नीतीश कुमार ही के द्वारा ही लिए जा रहे हैं लेकिन स्वास्थ्य मंत्री होने के नाते नीतीश कुमार के निर्णय को अमल में लाना मंगल पांडे की सबसे बड़ी चुनौती है। मंगल पांडे के हालिया बातों और ट्विटर पर लिखे संदेशों को देखें तो वह लगातार राज्य में स्वास्थ्य विभाग द्वारा उठाए गए कदमों का उल्लेख करते नजर आए हैं। राज्य में संक्रमित लोगों की संख्या बताते हुए नजर आए हैं या फिर जो लोग ठीक हो कर घर वापस लौट रहे हैं. उनकी भी संख्या बता रहे हैं। साथ ही साथ केंद्र सरकार से राज्य को किस तरीके की मदद मिल रही है यह भी बताने में मंगल पांडे पीछे नहीं हट रहे हैं। आज PPE kit की क्या व्यवस्था है, इसके अलावा मास्क कितने हैं, सैनिटाइजर का क्या स्थिति है, कितने हॉस्पिटल में कोरोनावायरस के मरीजों का टेस्ट किया जा सकता है, ऐसी तमाम चीजें मंगल पांडे ही जनता के सामने रखते हैं। बिहार के कृषि मंत्री प्रेम कुमार लगातार किसानों को यह भरोसा दे रहे हैं कि उनकी फसलें बर्बाद नहीं होंगी। उन्हें उनकी फसल का कीमत मिलता रहेगा। साथ ही साथ रबी की फसलों की कटाई हुई, अब उन्हें बिकने का भी समय आ गया है ऐसे में कृषि मंत्री किसानों को यह उम्मीद दे रहे हैं कि उनकी फसल की कीमत उचित रूप से दी जाएगी। बिहार के शिक्षा मंत्री भी इस कोरोनावायरस में शिक्षा व्यवस्था प्रभावित ना हो इसके लिए रणनीति बना रहे हैं। साथ ही राज्य में सड़कों और बिजली की व्यवस्था दुरुस्त रहे इसके लिए भी इन विभागों के मंत्री खूब सक्रिय नजर आ रहे हैं लेकिन इस कोरोनावायरस में राज्य के मुख्य सचिव दीपक कुमार और स्वास्थ्य मंत्रालय के भी मुख्य सचिव संजय कुमार का जिक्र करना भी जरूरी है। साथ ही साथ डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे भी पुलिस कमान का हौसला बरकरार रखने में जुटे हुए हैं ताकि लॉक डाउन का सख्ती से पालन कराया जा सके।

हालांकि वर्तमान में बिहार सरकार की सबसे ज्यादा आलोचना अपने प्रवासी मजदूरों और कोटा में फंसे छात्रों को राज्य में वापस नहीं बुलाने को लेकर हो रही है। पहले राज्य सरकार यह कहती रही कि हम बाहर फंसे अपने लोगों को तभी बुला पाने की स्थिति में रहेंगे जब केंद्र इसके लिए कोई ठोस दिशा निर्देश जारी करें। जब गृह मंत्रालय ने दूसरे राज्यों में फंसे लोगों को अपने गृह राज्य में बुलाने के आदेश दे दिए गए तब बिहार सरकार लगातार यह कह रही है कि हम इन लोगों को बुला पाने में सक्षम नहीं है। दरअसल, बिहार सरकार का यह तर्क है कि राज्य के लगभग 25 लाख से ज्यादा लोग बाहर है। ऐसे में इन सभी लोगों को बुला पाना संभव नहीं है। ऐसे में केंद्र सरकार स्पेशल ट्रेनें चलाएं या फिर हमें कुछ सहूलियत प्रदान करें। राज्य सरकार दूसरे राज्यों के मुख्यमंत्रियों से भी अपील कर रही है कि वे उनकी मदद करें।

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