यूक्रेन और चीन से लौटने को मजबूर हुए मेडिकल छात्रों को बड़ी राहत देने जा रही है भारत सरकार

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Jul 29, 2022

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने उच्चतम न्यायालय को बताया है कि मेडिकल के अंतिम वर्ष के उन छात्रों को एफएमजी परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जाएगी, जो कोविड और रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण भारत लौटे हैं और जिन्हें अधिसूचना तिथि पर डिग्री प्राप्त हुई है। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने 23 जून को एक हलफनामे में कहा कि विदेशी चिकित्सा स्नातक (एफएमजी) परीक्षा उत्तीर्ण करने पर, ऐसे विदेशी चिकित्सा स्नातकों को मौजूदा एक साल के मानदंड के बजाय दो साल के लिए कंपलसरी रोटेटिंग मेडिकल इंटर्नशिप (सीआरएमआई) करनी होगी। विदेशी चिकित्सा स्नातक दो वर्ष तक सीआरएमआई पूरा करने के बाद ही पंजीकरण के पात्र होंगे। एनएमसी के हलफनामे में कहा गया है कि क्लीनिकल प्रशिक्षण के लिए इंटर्नशिप की अवधि को दोगुना कर दिया गया है ।

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एनएमसी ने हलफनामे में कहा कि 29 अप्रैल के फैसले के बाद, उसके स्नातक चिकित्सा शिक्षा बोर्ड (यूजीएमईबी) ने अपनी विभिन्न बैठकों में विदेशी चिकित्सा स्नातकों से संबंधित मामले पर चर्चा की और विचार-विमर्श किया। यूजीएमईबी के सदस्यों, स्वास्थ्य मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के बीच विचार-विमर्श के दौरान, यह बताया गया कि यूक्रेन के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में 20,672 भारतीय छात्र नामांकित हैं, जो ऑनलाइन कक्षाएं ले रहे हैं। एनएमसी ने हलफनामे में कहा कि मेडिकल के अंतिम वर्ष के उन छात्रों को एफएमजी परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जाएगी, जो रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण भारत लौटे हैं और जिन्हें अधिसूचित होने की तिथि पर डिग्री प्राप्त हुई है। इनमें वे छात्र भी शामिल हैं, जो कोविड-19 के कारण चीन से लौटे हैं।

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