सियासी शतरंज में 'पवार' के दांव पेंच के सामने नहीं टिक पाते अपने, फडणवीस की सरकार गिराने वाले हैं मोदी के प्रिय

By अनुराग गुप्ता | Dec 10, 2021

साल 1940 में पुणे के बारामती में 12 दिसंबर को शारदाबाई गोविंदराव पवार ने एक बेटे को जन्म दिया और जन्म के तीन दिन ही बेटे ने राजनीतिक बैठक में हिस्सा लिया। मां शारदाबाई गोविंदराव ने बेटे को घूटी पिलाकर 15 दिसंबर को पुणे लोकल बोर्ड की एक बैठक में ले गईं। यह कोई और नहीं बल्कि भारतीय राजनीति के भीष्मपितामह कहे जाने वाले 'शरद पवार' के उदय की कहानी है... 

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इस गठबंधन में शिवसेना और कांग्रेस को एक साथ आना था लेकिन यह एनसीपी प्रमुख शरद पवार के बिना संभव नहीं था। शरद पवार के घर में बैठकों का दौर शुरू हुआ और सबकुछ तय हो गया। शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस ने मिलकर महाविकास अघाड़ी गठबंधन बनाया। लेकिन देखते ही देखते अजीत पवार ने चाचा शरद पवार को धोखा देते हुए तड़के सुबह भाजपा के साथ मिलकर सरकार बना ली। जिसके बाद चाचा पवार ने सियासी शतरंज की ऐसी चाल चली की अजीत पवार ने उपमुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया और देवेंद्र फडणवीस के नाम एक रिकॉर्ड दर्ज हो गया। वह रिकॉर्ड था सबसे कम समय तक मुख्यमंत्री रहने का।देवेंद्र फडणवीस अपने दूसरे कार्यकाल में महज 4 दिन तक ही सत्ता में रहे और शरद पवार की चाल के सामने अपने घुटने टेक दिए। 288 सदस्यीय विधानसभा में शिवसेना के 56, राकांपा के 54 और कांग्रेस के 44 विधायक हैं और इसी के दम पर शरद पवार ने न सिर्फ भतीजे की रणनीति विफल की बल्कि बाद में उसे महाविकास अघाड़ी सरकार में उपमुख्यमंत्री बना दिया है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2015 में एकदफा कहा था कि राजनीति की हवा किस तरफ चलेगी, इसे जानना चाहते हैं तो शरद पवार के पास बैठिए। राजनीतिक गलियारों में शरद पवार को लेकर एक बात काफी ज्यादा टहलती रहती है। कहते हैं कि शरद पवार जब ना कहें तो इसका मतलब हां होता है और जब हां कहें तो मतलब ना होता है...सियासत में 50 वर्ष से ज्यादा का अनुभवशरद पवार अपने ग्यारह भाईयों में से एक हैं और बढ़ती हुई उम्र में भी वो खुद को जवान महसूस करते हैं। शरद पवार साल 1967 में पहली बार बारामती से विधानसभा पहुंचे थे और उनके सामने कोई भी विरोधी नहीं टिक पाता था। 1990 तक उन्होंने इस सीट का प्रतिनिधित्व किया। साल 1984 में वो बारामती से सांसद बने थे लेकिन 1985 में विधानसभा चुनाव जीतने के बाद उन्होंने सांसद पद से इस्तीफा दे दिया था। 

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बारामती सीट पर पवार परिवार का कब्जाबारामती सीट से शरद पवार लगातार 6 बार विधायक रहे। इसके बाद उनके भतीजे अजीत पवार लगातार 7 बार विधायक रहे। शरद पवार ने एक बार कहा था कि मैं चुनाव के लिए कम जाता हूं लेकिन पांच साल में ज्यादा जाता हूं। 1978 के चुनाव में टुकड़ों में बंटी कांग्रेस ने चुनाव लड़ा था। कांग्रेस-यू और कांग्रेस-आई दोनों ने अपने उम्मीदवार उतारे थे। उस वक्त शरद पवार ने अपने गुरु यशवंतराव चव्हाण के साथ कांग्रेस-यू में शामिल हो गए। लेकिन जब चुनाव परिणाम आया तो उन्होंने जनता पार्टी को सत्ता से दूर रखने के लिए कांग्रेस-आई के साथ मिलकर सरकार बना ली।पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के बाद नरसिम्हा राव देश के प्रधानमंत्री बने। तब उनकी सरकार में शरद पवार ने रक्षा मंत्रालय का पदभार संभाला था। कई विभागों का पदभार संभाल चुके शरद पवार को कांग्रेस ने निष्कासित कर दिया था। जिसके बाद उन्होंने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का गठन किया। जिसके साथ कांग्रेस महाराष्ट्र में गठबंधन साथी है।साल 2019 में शरद पवार का एक ऐसा वीडियो सामने आया था जिसने एनसीपी की खोई हुई जमीन वापस ला दी थी। पश्चिमी महाराष्ट्र के सातारा में भारी बारिश के बीच शरद पवार ने रैली को संबोधित किया। दरअसल, शरद पवार अपने पुराने मित्र श्रीनिवास पाटिल के लिए सतारा में रैली कर रहे थे और चुनाव परिणाम में बारिश में भीगते हुए शरद पवार की मेहनत रंग भी लाई। इस चुनाव में श्रीनिवास पाटिल ने 80 हजार से ज्यादा मतों से चुनाव जीता था।

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