By रेनू तिवारी | Aug 22, 2026
भाजपा ने शनिवार को ‘वंदे मातरम्’ को लेकर कांग्रेस पर ‘‘तुष्टिकरण की राजनीति’’ करने का आरोप लगाया और कहा कि कोई भी दल या व्यक्ति संविधान और संसद द्वारा बनाए गए कानूनों से ऊपर नहीं है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के नेतृत्व में पार्टी के नवनियुक्तपदाधिकारियों की पहली बैठक में ‘वंदे मातरम्’ को लेकर एक प्रस्ताव पारित किया गया। यह प्रस्ताव कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) द्वारा 1937 के अपने फैसले की पुनः पुष्टि किए जाने के कुछ दिन बाद आया है, जिसमें पार्टी कार्यक्रमों में गीत के केवल पहले दो अंतरे गाने की बात कही गई थी।
भाजपा मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं सांसद संबित पात्रा ने कहा कि कांग्रेस को खुद को या अपनी कार्यसमिति को संसद से बड़ा नहीं समझना चाहिए। पात्रा ने कहा, ‘‘आज मैं देश से पूछना चाहता हूं कि संसद बड़ी है या सीडब्ल्यूसी? देश संसद में लिए गए फैसलों के आधार पर चलेगा या सीडब्ल्यूसी के फैसलों और प्रस्तावों के आधार पर?’’ उन्होंने कहा कि कोई भी राजनीतिक दल, परिवार या व्यक्ति संविधान और संसद द्वारा बनाए गए कानूनों से ऊपर नहीं हो सकता।
पात्रा ने कहा, ‘‘किसी परिवार, राजनीतिक दल या व्यक्ति को यह नहीं सोचना चाहिए कि वह देश के कानून, संविधान और संसद द्वारा बनाए गए कानूनों से बड़ा है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस कार्यसमिति अपने कार्यालय में बैठकर खुद को संसद से बड़ा नहीं समझ सकती। संसद लोकतंत्र का सर्वोच्च मंदिर है। संसद में लिया गया हर फैसला देश का फैसला होता है।’’
भाजपा प्रवक्ता ने कांग्रेस पर राजनीतिक तुष्टिकरण के लिए ‘वंदे मातरम्’ को लेकर विवाद पैदा करने का आरोप लगाया और कहा कि पार्टी इसके गायन में किसी भी तरह की बाधा डालने के प्रयास का विरोध करेगी। पात्रा ने कहा, ‘‘वंदे मातरम् राष्ट्र का गीत है। यह राष्ट्र का मंत्र है। यह हिंदुओं और मुसलमानों के बीच विभाजन पैदा करने का माध्यम नहीं है। कांग्रेस विभाजन के बीज बोने का प्रयास कर रही है। हम ऐसा नहीं होने देंगे।
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