RSS At 100: किसी स्वयंसेवी संगठन का संघ जितना विरोध नहीं हुआ, मोहन भागवत बोले- फिर भी स्वयंसेवकों के मन में समाज के लिए प्रेम

By अभिनय आकाश | Aug 27, 2025

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने अपनी स्थापना के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में तीन दिवसीय व्याख्यान श्रृंखला की शुरुआत की। व्याख्यानमाला 26 अगस्त को शुरू हुई, जहाँ आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने एक सभा को संबोधित किया और संगठन की उपलब्धियों और उसके भविष्य के मिशन पर प्रकाश डाला। भागवत ने जोर देकर कहा कि संगठन का उद्देश्य अपने योगदान के माध्यम से राष्ट्र को ‘विश्वगुरु’ बनाना है और इसका उद्देश्य प्रत्येक हिंदू में जिम्मेदारी की भावना पैदा करना है।

इसे भी पढ़ें: विधानसभा में शेर, आलाकमान के सामने चूहा...RSS प्रार्थना प्रकरण पर माफी के बाद शिवकुमार का किसने उड़ाया मजाक

उन्होंने कहा कि क्रांतिकारियों की एक और लहर थी। उस लहर से कई ऐसे उदाहरण निकले जो आज भी हमें प्रेरणा देते हैं... उस क्रांति का उद्देश्य आज़ादी के बाद समाप्त हो गया। सावरकर जी उस लहर के एक दैदीप्यमान रत्न थे... वह लहर अब मौजूद नहीं है और उसकी ज़रूरत भी नहीं है, लेकिन वह लहर देश के लिए जीने और मरने की प्रेरणा थी। 15 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि आज, मैं गर्व के साथ कहना चाहता हूँ कि 100 वर्ष पूर्व, एक संगठन का जन्म हुआ - राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस)। राष्ट्र सेवा के 100 वर्ष एक गौरवपूर्ण, स्वर्णिम अध्याय हैं। 'व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण' के संकल्प के साथ, माँ भारती के कल्याण के उद्देश्य से, स्वयंसेवकों ने मातृभूमि के कल्याण हेतु अपना जीवन समर्पित कर दिया... एक प्रकार से, आरएसएस दुनिया का सबसे बड़ा गैर सरकारी संगठन है। इसका 100 वर्षों का समर्पण का इतिहास है।

प्रमुख खबरें

Surya Parvat Palmistry: हथेली का सूर्य पर्वत तय करता है आपका Career, जानें क्या कहती हैं आपकी रेखाएं

Donald Trump का Iran को Final Warning, देर होने से पहले सुधर जाओ, अंजाम अच्छा नहीं होगा

तकनीकी खराबी के बाद लौटी Air India की London जाने वाली फ्लाइट, Delhi Airport पर सुरक्षित लैंडिंग

कांग्रेस का बड़ा हमला: Asaduddin Owaisi हैं BJP की B-Team, उन्हीं के इशारे पर लड़ते हैं चुनाव