Nobel Prize विनर Demis Hassabis का बड़ा दावा: इंसानी दिमाग से तेज होगा AGI, निगरानी के लिए बने Global Body

By Ankit Jaiswal | Jul 15, 2026

एआई की दुनिया तेजी से बदल रही है और अब इस तकनीक को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। गूगल डीपमाइंड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और नोबेल पुरस्कार विजेता डेमिस हैसाबिस का मानना है कि आर्टिफिशियल सामान्य बुद्धिमत्ता यानी ऐसी एआई जो लगभग हर बौद्धिक कार्य में इंसानों के बराबर या उनसे बेहतर प्रदर्शन कर सके, अब कुछ ही वर्षों की दूरी पर है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते इसके लिए मजबूत सुरक्षा व्यवस्था नहीं बनाई गई तो भविष्य में गंभीर चुनौतियां सामने आ सकती हैं।

मौजूद जानकारी के अनुसार हैसाबिस ने अमेरिका के नेतृत्व में एक वैश्विक निगरानी संस्था बनाने का प्रस्ताव दिया है। उनका कहना है कि फिलहाल दुनिया में एआई को लेकर कंपनियों और देशों के बीच प्रतिस्पर्धा तेज हो रही है, लेकिन संभावित जोखिमों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे एआई की क्षमता बढ़ेगी, वैसे-वैसे साइबर सुरक्षा, परमाणु सुरक्षा और जैविक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में नए खतरे भी सामने आ सकते हैं।

उन्होंने सुझाव दिया कि नई संस्था वित्तीय क्षेत्र की निगरानी करने वाली संस्थाओं की तर्ज पर काम करे। यह संस्था उन्नत एआई प्रणालियों के लिए सुरक्षा मानक तैयार करे और किसी भी नई प्रणाली को सार्वजनिक उपयोग से पहले सुरक्षा जांच से गुजरना अनिवार्य बनाया जाए। शुरुआती चरण में यह प्रक्रिया स्वैच्छिक हो सकती है, लेकिन बाद में इसे अनिवार्य करने की आवश्यकता होगी हैं।

गौरतलब है कि एआई क्षेत्र की दूसरी बड़ी कंपनी एंथ्रोपिक भी लगातार इस तकनीक से जुड़े जोखिमों को लेकर चेतावनी देती रही है। कंपनी का कहना है कि भविष्य में ऐसी प्रणालियां विकसित हो सकती हैं जो खुद को और अधिक सक्षम बनाने लगें। हालांकि विशेषज्ञ यह भी स्वीकार करते हैं कि अभी तक वैज्ञानिक पूरी तरह नहीं समझ पाए हैं कि अत्याधुनिक एआई प्रणालियां अपने भीतर किस तरह निर्णय लेती हैं।

डेमिस हैसाबिस का मानना है कि यदि आर्टिफिशियल सामान्य इंटेलिजेंस का सुरक्षित और जिम्मेदारी से विकास किया गया तो यह मानव सभ्यता के लिए सबसे परिवर्तनकारी तकनीकों में से एक साबित हो सकती है। उनके अनुसार इसका प्रभाव इंटरनेट या मोबाइल तकनीक से भी कहीं अधिक बड़ा होगा। उन्होंने इसकी तुलना बिजली और आग की खोज से करते हुए कहा कि यह तकनीक औद्योगिक क्रांति से कई गुना अधिक प्रभाव डाल सकती है और वह भी बहुत कम समय में।

उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल सामान्य इंटेलिजेंस दवाओं की खोज में तेजी लाने, स्वच्छ ऊर्जा विकसित करने, नए पदार्थ तैयार करने और कई जटिल वैज्ञानिक समस्याओं का समाधान खोजने में अहम भूमिका निभा सकती है। इससे मानव समाज के सामने मौजूद संसाधनों की कमी जैसी चुनौतियां भी काफी हद तक कम हो सकती हैं। गौरतलब है कि उद्योगपति एलन मस्क भी पहले कृत्रिम बुद्धिमत्ता को मानव विकास के लिए बड़ी संभावना और बड़े जोखिम दोनों बता चुके हैं।

हैसाबिस का कहना है कि भविष्य अभी तय नहीं हुआ है और दुनिया के पास अभी भी ऐसा समय है, जब सही नियम और सुरक्षा ढांचा तैयार कर इस तकनीक को पूरी मानवता के हित में विकसित किया जा सकता है। उनका मानना है कि आज लिए जाने वाले फैसले आने वाले समय में मानव सभ्यता की दिशा और गति दोनों तय करने वाले साबित हो सकते हैं।

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