Health Alert: Normal BP पर भी तेज है Heartbeat? हो सकता है गंभीर बीमारी का संकेत

By दिव्यांशी भदौरिया | Jan 26, 2026

अक्सर होता है कि बीपी सामान्य होता है लेकिन दिल की धड़कन यानी पल्स रेट तेज होती है। सामान्य वस्यको में पल्स रेट 60 से 100 बीट्स प्रति मिनट होती है, अगर पल्स रेट 100 से ऊपर चला जाए, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। भारी कसरत करने या तेज गति से चलने के बाद दिल की धड़कन बढ़ना सामान्य है, लेकिन इसके पीछे अन्य कारण भी हो सकते हैं। थायराइड हार्मोन का स्तर बढ़ने पर हार्टबीट तेज हो सकती है। वहीं शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी होने से ऑक्सीजन की सप्लाई प्रभावित होती है, जिससे पल्स रेट बढ़ जाता है। इसके अलावा अस्थमा इनहेलर, डीकंजेस्टेंट जैसी कुछ दवाएं भी दिल की धड़कन को तेज कर सकती हैं। इस लेख में हम हार्टबीट बढ़ने के ऐसे ही अन्य कारणों के बारे में विस्तार से जानेंगे।

तनाव और च‍िंता बन सकती है कारण

जो लोग काम का अत्यधिक दबाव या किसी अन्य वजह से लंबे समय तक तनाव और चिंता में रहते हैं,उनके शरीर में स्ट्रेस हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। इसका सीधा असर दिल पर पड़ता है और धड़कन तेज होने लगती है। कई बार ब्लड प्रेशर सामान्य रहने के बावजूद भी ज्यादा तनाव की स्थिति में हार्टबीट बढ़ सकती है।

ड‍िहाइड्रेशन भी हो सकता है कारण

शरीर में पानी की कमी से भी पल्स रेट बढ़ सकता है। क्योंकि शरीर में पानी की कमी से खून का वॉल्यूम कम हो जाता है और इसकी भरपाई के लिए दिल को तेजी से पंप करना पड़ता है जिससे दिल की धड़कन तेज हो जाती है। इसके अलावा जो लोग कैफीन का सेवन करते हैं या धूम्रपान करते हैं उनमें भी हाई पल्स रेट की समस्या हो सकती है।

बीपी नार्मल और द‍िल की तेज धड़कन है बीमारी का संकेत

नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के एक अध्ययन के मुताबिक, जिनकी पल्स रेट ज्यादा होती है, उनमें हार्ट की बीमारियों का खतरा ज्यादा पाया गया जबकि उनका बीपी नॉर्मल रेंज में था। अध्ययन में यह भी पता चला है कि दिल की तेज धड़कन के कारण बाद में हाई बीपी या अन्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। यदि आपका बीपी सामान्य है, लेकिन पल्स रेट तेज है, तो भी स्वास्थ्य जोखिमों का खतरा और खासकर दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

द‍िल की धड़कन तेज होने पर क्‍या करें?

 - दिल की धड़कन तेज होने पर पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।

 - सिगरेट और फैफीन का सेवन न करें।

 - एक्सरसाइज, योग, प्राणायाम और मेडिटेशन करें।

 - संतुलित डाइट जरुर लें। अपने आहार में आयरन और पोषक तत्वों को शामिल करें।

 - यदि तेज धड़कन, सीने में दर्द, सांस फूलने जैसे लक्षण नजर आएं, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

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