By Ankit Jaiswal | Jul 14, 2026
विश्व कप से बाहर होने के बाद आम तौर पर किसी भी टीम के खिलाड़ियों के चेहरे पर निराशा दिखाई देती है, लेकिन नॉर्वे में इस बार कुछ अलग ही नजारा देखने को मिला। टीम भले ही खिताब की दौड़ से बाहर हो गई, लेकिन देशवासियों ने खिलाड़ियों का स्वागत ऐसे किया मानो वे विश्व विजेता बनकर लौटे हों। राजधानी ओस्लो की सड़कों पर एक लाख से अधिक लोग जुटे और पूरे उत्साह के साथ अपनी टीम का अभिनंदन किया।
मौजूद जानकारी के अनुसार सोमवार दोपहर से ही ओस्लो स्थित शाही महल के आसपास बड़ी संख्या में लोग जुटने लगे थे। गर्मियों की धूप के बीच हजारों प्रशंसकों ने राष्ट्रीय झंडे और टीम के रंगों के साथ खिलाड़ियों के स्वागत की तैयारी की। अनौपचारिक अनुमान के मुताबिक इस समारोह में एक लाख से अधिक लोग शामिल हुए, जो नॉर्वे के खेल इतिहास के सबसे बड़े स्वागत कार्यक्रमों में गिना जा रहा।
विश्व कप से लौटने पर नॉर्वे की टीम के विमान का पारंपरिक जल तोपों की सलामी के साथ स्वागत किया गया। इसके बाद खिलाड़ी राजधानी में आयोजित स्वागत समारोह के लिए पहुंचे। सबसे पहले पूरी टीम ने राजा हेराल्ड से मुलाकात की। इसके बाद खिलाड़ी शाही महल की सीढ़ियों पर आए और वहां मौजूद हजारों प्रशंसकों का अभिवादन किया। इस दौरान शाही सुरक्षा दस्ते के जवान भी सम्मान की मुद्रा में मौजूद रहे।
गौरतलब है कि नॉर्वे के स्टार स्ट्राइकर एरलिंग हालांड समारोह के अंतिम हिस्से में दिखाई नहीं दिए। वह कार्यक्रम पूरा होने से पहले ही रवाना हो गए थे। इसकी वजह टीम की अमेरिका से वापसी में हुई करीब चार घंटे की देरी बताई गई। इसी कारण एरलिंग हालांड और मिडफील्ड खिलाड़ी सांडेर बेर्गे को अपनी निर्धारित उड़ान पकड़ने के लिए पहले निकलना पड़ा।
नॉर्वे के मुख्य कोच स्टाले सोलबाकेन ने बताया कि यात्रा में देरी होने के कारण दोनों खिलाड़ियों को समय से पहले जाना पड़ा। इसी वजह से एरलिंग हालांड अपने साथियों के साथ शाही महल की सीढ़ियों पर आयोजित अंतिम पारंपरिक उत्सव में शामिल नहीं हो सके। इस कार्यक्रम में हजारों प्रशंसकों ने खिलाड़ियों के साथ मिलकर नॉर्वे की प्रसिद्ध वाइकिंग शैली का सामूहिक उत्साह प्रदर्शन किया, जिसकी अगुवाई युवराज हाकोन ने ढोल बजाकर की।
इसके बाद पूरी टीम खुले वाहन में सवार होकर ओस्लो शहर की सड़कों पर निकली, जहां रास्ते भर लोगों ने तालियों, नारों और झंडों के साथ खिलाड़ियों का स्वागत किया। गौरतलब है कि विश्व कप में नॉर्वे का यह अभियान भले ही ट्रॉफी तक नहीं पहुंच सका, लेकिन टीम के जुझारू प्रदर्शन ने देशवासियों का भरोसा और सम्मान दोनों जीत लिया।