Vinayak Damodar Savarkar Death Anniversary: सिर्फ क्रांतिकारी नहीं, हिंदुओं की 7 बेड़ियां तोड़ने वाले Social Reformer भी थे वीर सावरकर

By अनन्या मिश्रा | Feb 26, 2026

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में विनायक दामोदर सावरकर सबसे विवादित क्रांतकारियों में से एक रहे हैं। हालांकि वीर सावरकर की देश की आजादी की लड़ाई में अहम भूमिका रही है। उन्होंने देश की आजादी के संघर्ष के साथ हिंदू कुरीतियों के खिलाफ समाज को मुक्त कराने के लिए कार्य किए थे। एक लेखक के रूप में वीर सावरकर का लेखन विचारोत्तेजक और प्रभावी माना जाता था। आज ही के दिन यानी की 26 फरवरी को विनायक दामोदर सावरकर का निधन हो गया था। तो आइए जानते हैं उनकी डेथ एनिवर्सरी के मौके पर विनायक दामोदर सावरकर के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...

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काला पानी की सजा

साल 1909 में मॉर्ले मिंटो सुधार के खिलाफ सशस्त्र विरोध की साजिश रचने के आरोप में वीर सावरकर को गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने पानी में कूदकर भागने की कोशिश की, लेकिन उनको फिर गिरफ्तार कर लिया गया। साल 1911 में उनको दो बार कालापानी यानी की आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। बता दें कि सावरकर को इस कारण से गद्दार भी कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने रिहाई के लिए अंग्रेजों से माफी मांगी थी।

हालांकि सावरकर के समर्थकों का मानना है कि सावरकर द्वारा यह माफी अपने साथी राजनैतिक कैदियों के लिए मांगी गई थी। साल 1942 में सावरकर को इस शर्त के साथ रिहा किया गया था कि वह 5 साल तक राजनीति में सक्रिय नहीं होंगे। वीर सावरकर ने रत्नागिरी में अस्पृश्यता को खत्म करने के लिए भी कार्य किया था। उन्होंने सभी जातियों के हिंदुओं के साथ खाना खाने की परंपरा शुरू की थी।

लेखक थे सावरकर

वीर सावरकर एक लेखक थे और उनके द्वारा लिखी गई बहुत सी किताबों पर अंग्रेजों ने पाबंदियां लगा दी थीं। इनमें से एक किताब 'द इंडिपेंडेंस वार ऑफ दे इंडिपेंडेंस ऑफ 1857' थी। इस किताब को लाख प्रयासों के बाद भी अंग्रेज नीदरलैंड में प्रकाशिक होने से नहीं रोक सके थे। सावरकर ने कुल 38 किताबें लिखी थीं। जोकि प्रमुख रूप से अंग्रेजी और मराठी में थी।

समाज सेवा

वीर सावरकर ने हिंदुओं के उत्थान के लिए लोगों से अपने धर्म की 7 बेड़ियों को तोड़ने की अपील की थी। इसमें व्यवसायबंदी, स्पर्शबंदी, वेदोत्कबंदी, समुद्रबंदी, रोटी बंदी, शुद्धिबंधी और बेटी बंदी आदि शामिल था।

मृत्यु

अपने जीवन के अंतिम समय में वीर सावरकर ने समाधी लेने का फैसला किया और 01 फरवरी 1966 में खाना-पीना छोड़ दिया। वहीं 26 फरवरी 1966 को वीर सावरकर का निधन हो गया। 

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