By अनन्या मिश्रा | Jul 02, 2026
अक्सर हम सभी स्किन के फीके या पीले पड़ने को सिर्फ कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन मेडिकल भाषा में इसको 'पैलर' कहा जाता है। यह ब्लड से जुड़ी कई गंभीर बीमारियों का अलर्ट हो सकता है। स्किन में पीलापन मुख्य रूप से एनीमिया की वजह से होता है। इस स्थिति में शरीर में ऑक्सीजन ले जाने वाले हीमोग्लोबिन या रेड ब्लड सेल्स की कमी हो जाती है। हीमोग्लोबिन घटने से ब्लड की लालिमा कम हो जाती है। जिससे हमारी स्किन और म्यूकस मेम्ब्रेन का रंग उड़ने लगता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि वह कौन-कौन सी स्थितियां हैं, जो इस पीलेपन की वजह बन सकती है।
वहीं रेड ब्लड कोशिकाओं के सही विकास के लिए विटामिन B12 और फोलेट जरूरी है। शरीर में इनकी कमी होने पर स्किन का रंग प्रभावित होता है।
अप्लास्टिक एनीमिया नामक दुर्लभ बीमारी में हमारा बोन मैरो नई रक्त कोशिकाओं का निर्माण करीब-करीब बंद कर देता है।
बता दें कि हेमोलिटिक एनीमिया एक ऐसा विकार है, जिसमें शरीर के अंदर पुरानी रेड ब्लड कोशिकाएं तेजी से नष्ट होती है। वहीं शरीर इतनी जल्दी नई कोशिकाएं नहीं बना पाता है।
थैलेसीमिया और सिकल सेल एनीमिया पेरेंट्स से मिलने वाली आनुवांशिक बीमारियां हैं। जोकि हीमोग्लोबिन के बनने के प्रोसेस और उसकी बनावट को बिगाड़ देती है।
बता दें कि कुछ मामलों में स्किन का पीलापन खून के कैंसर या फिर अन्य जटिल समस्याओं की तरफ इशारा करता है।
ल्यूकेमिया की बीमारी में बोन मैरो के भीतर खराब सफेद ब्लड कोशिकाएं तेजी से बढ़ने लगती है। इससे हेल्दी रेड ब्लड कोशिकाओं का बनना रुक जाता है।
पैनसाइटोपेनिया एक गंभीर स्थिति है, इसमें शरीर के अंदर लाल ब्लड कोशिकाओं, सफेद ब्लड कोशिकाओं और प्लेटलेट्स तीनों की संख्या एक साथ काफी नीचे गिर जाती है।
कई बार शरीर में खून का बहाव रुकने या फिर अचानक खून बह जाने से भी स्किन पीली पड़ जाती है।
सर्जरी, किसी बड़ी चोट और पेट के अल्सर या मासिक धर्म में ज्यादा खून बहने से बॉडी में ब्लड का लेवल अचानक से गिर जाता है।
अगर किसी नस में खून का थक्का जम जाता है, तो वहां पर भी ब्लड सर्कुलेशन बाधित हो जाता है। इससे शरीर से उस हिस्से में अचानक पीलापन हो सकता है।
जब अचानक से ब्लड प्रेशर का खतरनाक लेवल तक गिर जाता है। तो शरीर खून को स्किन की जगह सीधे जरूरी अंगों तक पहुंचाने लगता है। इससे भी व्यक्ति एकदम पीला पड़ जाता है।
लंबे समय तक रहने वाले पीलेपन की पहचान के लिए डॉक्टर सिर्फ चेहरे या बाहरी स्किन को नहीं देखते हैं। वह हथेलियों की रेखाओं, मसूड़ों की जांच और आंखों की निचली पलकों के अंदर की जांच करते हैं। खासकर गहरे या सांवले रंग की स्किन वाले लोगों में बाहरी स्किन से पीलापन पकड़ना मुश्किल होता है। यह डॉक्टर के लिए यह तरीके काफी प्रभावी साबित होते हैं।
अगर आप रेगुलर ब्लड डोनर हैं, तो आपको इस पीलेपन से घबराने की जरूरत नहीं है। ब्लड डोनेशन के बाद आपके शरीर में आयरन, तरल पदार्थ और लाल रक्त कोशिकाओं के कम होने या फिर से बनने का प्रोसेस लगातार चलती रहती है।