By अंकित सिंह | Aug 17, 2026
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस बात की जांच की मांग की है कि क्या पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने अपने कार्यकाल के दौरान नक्सलवाद के खिलाफ जानबूझकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया। यह टिप्पणी 17 अगस्त को चिदंबरम के उस सोशल मीडिया पोस्ट के बाद की गई, जिसमें उन्होंने खुद को दिमागी नक्सल बताया था। गुवाहाटी में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए सरमा ने चिदंबरम के खुद को दिए गए इस नाम की आलोचना करते हुए कहा कि पी चिदंबरम 'दिमागी नक्सल' नहीं, बल्कि पूरी तरह से नक्सल हैं। अब जब देश के गृह मंत्री रहे पी. चिदंबरम ने खुद को 'दिमागी नक्सल' कहा है, तो इस बात की जांच होनी चाहिए कि क्या उन्होंने देश के गृह मंत्री के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान नक्सलवाद को खत्म करने के लिए जानबूझकर कोई कार्रवाई नहीं की थी।
पीएम मोदी ने कहा कि सालों से सार्वजनिक जीवन में माओवादी सोच वाले लोग मौजूद रहे हैं; सरकारी समितियों में भी इस सोच ने कई संस्थानों और पहलों को प्रभावित किया है। मेरे प्यारे देशवासियों, हम 'हथियारबंद नक्सल' (armed naxal) पर काबू पाने और देश को उनसे मुक्त करने में सफल रहे हैं। भले ही ये नक्सल खत्म हो गए हों, लेकिन 'दिमागी नक्सल' (नक्सली सोच वाले लोग) मौके की तलाश में हैं, हिंसा के तरीके ढूंढ रहे हैं और देश को गलत रास्ते पर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। हमें इन दिमागी नक्सलियों की पहचान करने, उन्हें अलग-थलग करने और एक विकसित देश के लिए युवाओं को एकजुट करने की ज़रूरत है।
इसके जवाब में पी. चिदंबरम ने X पर पोस्ट किया, मुझे 'दिमागी नक्सल' होने पर गर्व है! इसके अलावा, सरमा ने कांग्रेस नेताओं सोनिया गांधी और राहुल गांधी की आलोचना करते हुए उन पर देश का विरोध करने और देश का माहौल खराब करने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम के गायन के दौरान सोनिया गांधी का व्यवहार यह साफ कर देता है कि अगर कांग्रेस सत्ता में आई तो देश का क्या होगा। ये लोग खुलेआम देश-विरोधी गतिविधियां कर रहे हैं, जैसे लोगों को विरोध-प्रदर्शन के लिए उकसाना और देश में अराजकता का माहौल बनाने के लिए कहना।
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