By अनन्या मिश्रा | Feb 07, 2026
दुनियाभर में तेजी से बढ़ती क्रॉनिक बीमारियों जैसे डायबिटीज, हृदय रोग और मेटाबॉलिज्म की समस्या के लिए खानपान और लाइफस्टाइल में गड़बड़ी को प्रमुख कारण माना जाता है। हेल्थ एक्सपर्ट कहते हैं कि सभी लोगों को अपने वेट को कंट्रोल में रखना बेहद जरूरी है। बढ़ते वेट या हाई बॉडी मास इंडेक्स की स्थिति कई गंभीर और जानलेवा बीमारियों का प्रमुख कारण पाया गया है। अध्ययनों से पता चलता है कि जिन लोगों का वेट अधिक होता है, उनमें हृदय से संबंधित बीमारियां, टाइप-2 डायबिटीज और आर्थराइटिस का खतरा तो रहता ही है। साथ ही मोटापे को दिमागी सेहत के लिए भी खतरनाक पाया गया है।
हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक आज के समय में मोटापा एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है। पहले इसको सिर्फ वयस्कों की समस्या माना जाता था, तो वहीं अब किशोर और बच्चे भी तेजी से मोटापे का शिकार होते जा रहे हैं। ज्यादा बढ़े वजन की स्थिति शरीर के कई अंगों और प्रणालियों को प्रभावित करता है। अगर समय रहते वेट को कंट्रोल नहीं किया जाए, तो इससे आपके सोचने-समझने, याददाश्त और निर्णय लेने संबंधित दिक्कतें भी बढ़ सकती हैं। एक अध्ययन में पाया गया है कि जिन लोगों का वेट अधिक होता है, उनमें भविष्य में अल्जाइर रोग-डिमेंशिया का खतरा भी अधिक देखा गया है।
एक अध्ययन के आधार पर दुनिया के जाने-माने हेल्थ एक्सपर्ट ने अलर्ट किया है कि वेट ज्यादा होने या मोटापे की वजह से व्यक्ति में डिमेंशिया का खतरा काफी बढ़ जाता है। ऐसे में अगर समय रहते वेट लॉस कर दिया जाए और बीपी को कंट्रोल कर लिया जाए, तो डिमेंशिया के लाखों मामलों को रोका जा सकता है।
एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बीएमआई और वैस्कुलर डिमेंशिया के बीच सीधा संबंध पाया है।
दिमाग में खून के प्रवाह में कमी की वजह से वैस्कुलर डिमेंशिया होता है। यह दिमाग की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाता है और कोशिकाएं डेड होने लग जाती हैं।
यह दिमाग में छोटी खून की नसों के ब्लॉक होने या सिकुड़ने की वजह से होता है। जिसको अक्सर लाइफस्टाइल कारकों या स्ट्रोक से जोड़कर देखा जाता है।
मोटापे के शिकार लोगों में स्ट्रोक का खतरा अधिक होता है। यही वजह है कि विशेषज्ञ भी सभी लोगों को कम उम्र से अपने वेट को कंट्रोल रखने पर ध्यान देने की सलाह देते हैं।
एक अध्ययन में पाया गया है कि हाई बीएमआई और हाई बीपी डिमेंशिया के सीधे कारण हैं। बढ़े हुए वेट और ब्लड प्रेशर का इलाज और रोकथाम डिमेंशिया के रोकथाम में काफी मददगार हो सकता है।
इस अध्ययन के लिए 5 लाख से ज्यादा प्रतिभागियों को शामिल किया गया। इसमें उनके वजन और कारणों की जांच की गई।
जिन लोगों का बीएमआई जेनेटिकली अधिक था, उनमें वैस्कुलर डिमेंशिया होने का खतरा अधिक पाया गया।
डिमेंशिया के बढ़े हुए खतरे को करीब एक चौथाई हिस्सा हाई बीपी की वजह से था।
एक्सपर्ट की मानें, यह अध्ययन दिखाता है कि वेट और ब्लड प्रेशर की रोकथाम के लिए किए गए उपाय दिमाग की इस खतरनाक बीमारी के खतरे को कम करने वाले साबित हो सकते हैं।
एक्सपर्ट के अनुसार, डिमेंशिया एक खतरनाक बीमारी है, जिससे अभी भी दुनियाभर में 50 मिलियन से ज्यादा लोग प्रभावित हैं। लेकिन दुर्भाग्य है कि इसके इलाज और बचाव के तरीके कम हैं। यह अध्ययन आपको डिमेंशिया से बचाव के लिए एक कारगर उपाय दे रहा है।
जिन लोगों के परिवार में पहले से किसी को यह बीमारी या फिर अधिक वजन की समस्या रही है। उनको इन बीमारी को लेकर अधिक सतर्कता बरतनी चाहिए। कम उम्र से ही अगर आप वेट कंट्रोल करने वाले उपाय अपनाते हैं, तो इससे न सिर्फ आपका ब्लड प्रेशर कंट्रोल होता है, साथ ही डायबिटीज, हृदय रोग और डिमेंशिया से भी काफी हद तक खुद को सुरक्षित कर सकते हैं।
एक्सपर्ट की मानें, तो जिन लोगों का वेट सामान्य से अधिक है, उनमें दिल की बीमारी, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और जोड़ों की समस्याओं जैसे अर्थराइटिस का खतरा अधिक हो सकता है। वेट चेक करने के लिए बॉडी मास इंडेक्स की जांच को कारगर तरीका माना जाता है। हालिया अध्ययन में वैज्ञानिकों की टीम ने बताया कि मोटापे के खतरे का पता लगाने में वेस्ट-टू-हाट रेशियो बीएमआई की तुलना में अधिक बेहतर हो सकता है।