By अनन्या मिश्रा | Jun 08, 2025
तिथि और शुभ मुहूर्त
पूजन विधि
इस दिन सुबह जल्दी स्नान आदि करके भगवान शिव और मां पार्वती का ध्यान करें। फिर सूर्य देव को अर्घ्य दें और शिवलिंग पर दूध, दही, घी, गंगाजल, बेलपत्र, शहद और धतूरा आदि अर्पित करें। साथ ही 'ऊँ नम: शिवाय' मंत्र का जाप करें। आप चाहें तो पूजा के दौरान महामृत्युंजय मंत्र का भी जप कर सकते हैं। इसके बाद रवि प्रदोष व्रत की कथा का पाठ करें। इस दिन जरूरतमंदों व गरीबों को दान देना चाहिए।
महत्व
धार्मिक मान्यता के मुताबिक जो भी रवि प्रदोष का व्रत पूरी निष्ठा और भक्ति के साथ करता है, उसके जीवन में आने वाले कष्टों का अंत हो जाता है और घर-परिवार से सुख-शांति बनी रहती है। वहीं भोलेनाथ की कृपा से व्यक्ति का आत्मविश्वास बढ़ता है। रवि प्रदोष का व्रत करने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं दूर होती हैं और पितृ दोष का भी निवारण होता है। रवि प्रदोष का व्रत सूर्यदेव को समर्पित होता है, ऐसे में यह व्रत करने से कुंडली में सूर्य की भी स्थिति अच्छी होती है।