By प्रज्ञा पांडेय | Apr 30, 2026
आज नरसिंह जयंती है, नरसिंह जयंती हिंदू धर्म का एक पवित्र पर्व है और नरसिंह जयंती का विशेष महत्व है। यह त्यौहार भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार की स्मृति में मनाया जाता है तो आइए हम आपको नरसिंह जयंती व्रत का महत्व एवं पूजा विधि के बारे में बताते हैं।
पंडितों के अनुसार पूजा का सबसे शुभ समय मध्याह्न संकल्प और पूजा मुहूर्त माना जाता है, जो सुबह 10.59 बजे से दोपहर 01.38 बजे तक रहेगा। इसके अलावा सायंकाल पूजा का समय शाम 04.17 बजे से 06.56 बजे तक शुभ माना गया है. भक्त इस अवधि में पूजा और व्रत का पालन करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नरसिंह जयंती का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व बहुत अधिक है। भगवान अपने सच्चे भक्तों की हमेशा रक्षा कर करते हैं। प्रह्लाद की भक्ति और भगवान नरसिंह का प्रकट होना इस बात का प्रतीक है कि सच्ची आस्था कभी व्यर्थ नहीं जाती। इस दिन व्रत रखने से भय, संकट और और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति मिलने की मान्यता है। भगवान नरसिंह की कृपा से जीवन में आने वाले संकटों का नाश होता है। वे अपने भक्तों की रक्षा करते हैं। उनकी पूजा करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में आने वाले कष्टों से छुटकारा मिलता है। इसके अलावा नरसिंह जयंती के दिन व्रत रखने और भगवान नरसिंह की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और साथ ही ग्रह-दोष से भी मुक्ति मिलती है।
पंडितों के अनुसार नरसिंह जयंती का व्रत बहुत खास होता है इसलिए इस दिन सुबह उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को साफ करें और गंगाजल से पवित्र करें। एक वेदी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं और भगवान नरसिंह की प्रतिमा स्थापित करें। अगर नरसिंह जी की प्रतिमा न हो तो भगवान विष्णु की तस्वीर भी स्थापित कर सकते हैं। पूजा शुरू करने से पहले व्रत और पूजा का संकल्प लें। भगवान नरसिंह की प्रतिमा को पंचामृत से स्नान कराएं। चंदन, कुमकुम, हल्दी और गुलाल आदि चीजें अर्पित करें और उन्हें पीले या लाल रंग के वस्त्र पहनाएं और पीले फूलों की माला चढ़ाएं। भगवान नरसिंह को फल, मिठाई, विशेष रूप से गुड़ और चना अर्पित करें। पूजा में तुलसी दल जरूर शामिल करें और घी का दीपक जलाएं। भगवान नरसिंह के मंत्रों का जाप करें, अंत में भगवान नरसिंह की आरती करें। पूजा के दौरान हुई गलतियों के लिए माफी मांगे और अपनी क्षमतानुसार गरीबों और जरूरतमंदों को दान करें।
पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान विष्णु ने अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए नरसिंह अवतार लिया था, उसमें भगवान नरसिंह का आधा शरीर मनुष्य का और आधा शरीर सिंह का था। वह हिरण्यकश्यप के अत्याचारों से मुक्ति दिलाने के लिए दोपहर के समय खंभा फाड़कर प्रकट हुए थे। उन्होंने घर की दहलीज पर हिरण्यकश्यप को अपने जंघे पर लिटाकर दोनों हाथों के नखों से उसका पेट फाड़ दिया था। हिरण्यकश्यप को वरदान था कि उसे मनुष्य या जानवर, दिन या रात में, अस्त्र या शस्त्र से नहीं मारा जा सकता था, इस वजह श्रीहरि ने सबसे अनोखा स्वरूप नरसिंह का धारण किया था।
पंडितों के अनुसार नरसिंह जयंती के दिन भगवान नरसिंह का यदि विधि-विधान से किया जाए तो शत्रुओं का नाश होता है और मन के भीतर मौजूद डर खत्म होता है। इस दिन ॐ नृसिंहाय नमः या उग्रं वीरं महाविष्णुं मंत्र का 108 बार जाप करना चाहिए। इससे मन शांत होगा और निगेटिविटी दूर होगी। नरसिंह जयंती के दिन भगवान नरसिंह की पूजा करते समय पीले रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है और इस दिन जरूरतमंद लोगों की मदद अवश्य करनी चाहिए. यदि संभव हो तो अपनी क्षमता के अनुसार अन्न व धन का भी दान करें। नरसिंह जयंती के दिन मन को नकारात्मक विचारों से दूर रखें और क्रोध से बचें। इस दिन शांत मन के साथ धैर्य बनाकर रखें। इससे न केवल मानसिक शांति मिलेगी, बल्कि घर व जीवन में भी सुख-समृद्धि आएगी।
ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्। नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्यु मृत्युं नमाम्यहम्।।
ॐ नृम नरसिंहाय शत्रुबल विदीर्नाय नमः। ॐ नृम मलोल नरसिंहाय पूरय-पूरय
- प्रज्ञा पाण्डेय