By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Jul 28, 2026
भुवनेश्वर, 27 जुलाई ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने सोमवार को विहिप नेता स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या और 2008 में कंधमाल में हुई सांप्रदायिक हिंसा की जांच करने वाले आयोग की रिपोर्ट के गायब होने की सीआईडी जांच के आदेश दिए। यह घटना तब हुई थी, जब राज्य में बीजू जनता दल (बीजद) की सरकार थी। इस मामले की जांच भुवनेश्वर-कटक पुलिस आयुक्तालय कर रहा था।
यहां कैपिटल पुलिस थाने में 10 जून को गुमशुदगी की रिपोर्ट के संबंध में एक मामला दर्ज किया गया था, जिसकी जांच पुलिस आयुक्तालय कर रहा है। गृह विभाग के संयुक्त सचिव शरत चंद्र मरांडी की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की गई। शिकायतकर्ता ने कहा कि इन दो रिपोर्ट के गायब होने से जुड़ी परिस्थितियां यह वाजिब शक पैदा करती हैं कि हो सकता है दस्तावेजों को जानबूझकर हटाया गया हो, अपने पास रखा गया हो, छिपाया गया हो, नष्ट किया गया हो या उनके साथ किसी और तरह से गैर-कानूनी तरीके से व्यवहार किया गया हो।
अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री ने यह मामला सीआईडी अपराध शाखा को सौंप दिया है। ऐसा तब किया गया, जब तीन पूर्व आईएएस अधिकारियों—नौकरशाह से नेता बने वी.के. पांडियन, यू.एन. बेहरा और राजेश वर्मा—को इस महीने पूछताछ के लिए बुलाए जाने के बावजूद वे जांच अधिकारी के सामने पेश नहीं हुए। पांडियन ने पुलिस को बताया है कि वह विदेश में होने के कारण पेश नहीं हो सके।
वहीं, राजेश वर्मा को 30 जुलाई को जांच अधिकारी के सामने पेश होने के लिए एक और नोटिस जारी किया गया है। नवंबर 2015 से जनवरी 2017 के बीच पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के अतिरिक्त मुख्य सचिव के तौर पर काम करने वाले बेहेरा रविवार को पुलिस के सामने पेश नहीं हुए। फाइलों के गायब होने से ओडिशा में राजनीतिक बहस छिड़ गई है, खासकर कंधमाल हिंसा पर नायडू आयोग की संवेदनशील रिपोर्ट को लेकर, जिसे 2016 में सौंपा गया था, लेकिन कभी सार्वजनिक नहीं किया गया।