US-Venezuela टकराव के बाद तेल कंपनियों पर नजर, शेवरॉन को मिल सकता है बड़ा फायदा

By Ankit Jaiswal | Jan 05, 2026

शनिवार सुबह अमेरिका की ओर से वेनेजुएला पर की गई सैन्य कार्रवाई ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। शुरुआत में यह घटनाक्रम अचानक लगा, लेकिन इसके पीछे रणनीतिक और आर्थिक संकेत भी साफ दिखाई दे रहे हैं।

गौरतलब है कि वेनेजुएला दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार रखने वाला देश माना जाता है। मौजूद जानकारी के अनुसार, फिलहाल केवल शेवरॉन कॉरपोरेशन ऐसी प्रमुख अमेरिकी तेल कंपनी है, जो वेनेजुएला में सक्रिय रूप से काम कर रही है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे ही वॉल स्ट्रीट में ट्रेडिंग शुरू होगी, निवेशक इस भू-राजनीतिक घटनाक्रम को ध्यान में रखते हुए अमेरिकी तेल शेयरों में संभावित लाभ को आंकना शुरू कर देंगे।

बासव कैपिटल के सह-संस्थापक संदीप पांडे के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम से सबसे अधिक फायदा शेवरॉन को हो सकता है, क्योंकि वह वेनेजुएला में पहले से मौजूद है और वहां के करीब 25 प्रतिशत तेल भंडार की खोज और उत्पादन गतिविधियों से जुड़ी रही है। उनका कहना है कि नई अमेरिकी रणनीति के तहत शेवरॉन के शेयरों में अन्य तेल कंपनियों की तुलना में ज्यादा तेजी देखने को मिल सकती है।

उन्होंने यह भी बताया कि एक्सॉन मोबिल, कोनोकोफिलिप्स, हॉलिबर्टन और श्लमबर्जर जैसी कंपनियां भी आने वाले समय में वेनेजुएला में नई परियोजनाएं हासिल कर सकती हैं। ऐसे में अमेरिकी शेयर बाजार में इन कंपनियों के स्टॉक्स निवेशकों का ध्यान खींच सकते हैं।

शेवरॉन के शेयरों को लेकर तकनीकी विश्लेषकों की राय भी उत्साहजनक दिखाई दे रही है। लक्ष्मीश्री के रिसर्च हेड अंशुल जैन के मुताबिक, लंबे समय से सीमित दायरे में चल रहे शेवरॉन के शेयर अब मजबूत ब्रेकआउट के संकेत दे रहे हैं। उनका मानना है कि मौजूदा भू-राजनीतिक हालात इस तेजी के लिए बाहरी उत्प्रेरक का काम कर सकते हैं।

बता दें कि अमेरिका ने 3 जनवरी 2026 को वेनेजुएला के राष्ट्रपति को हिरासत में लेकर उन पर मादक पदार्थ तस्करी और साजिश जैसे आरोपों में अमेरिकी अदालत में पेश करने की तैयारी की है। इसके साथ ही अमेरिकी प्रशासन ने यह भी संकेत दिया है कि वेनेजुएला की जर्जर तेल अवसंरचना को सुधारने के लिए अमेरिकी कंपनियां बड़े पैमाने पर निवेश करेंगी। गौरतलब है कि नवंबर 2025 में वेनेजुएला का तेल उत्पादन करीब 9 लाख बैरल प्रतिदिन था, जो एक दशक पहले के स्तर से काफी कम है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटनाक्रम का असर सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक तेल बाजार और निवेश धारणा पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ सकता है, जिसे आने वाले दिनों में शेयर बाजारों में साफ तौर पर देखा जा सकता है।

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