By संतोष उत्सुक | Mar 12, 2022
विदेशी पुरानी चीज़ों से बहुत प्यार करते हैं और जो हमारे यहां बरसों से होता रहा है उसे करके नया बताते हैं। जींस को फाड़, काट, धागे लटका कर फैशन का पैशन बना दिया है। हमारे यहां जब गरीबी थी तो ऐसे ही कपड़े पहनते थे। अब यह ट्रेंड विदेश जाकर स्वदेश लौट आया और नया फैशन बन गया है। प्राचीन काल की पेंटिंग्स या तस्वीरें देखी जाएं तो औरतें नाभि से ऊपर छोटा वस्त्र पहनती थी और उस पर अंग वस्त्र जैसा ओढ़े रखती थी। मर्द लोग भी कमर से ऊपर कुछ नहीं पहनते थे। फिर भारतीय संस्कृति में शर्म प्रवेश कर गई, शायद फिल्मों ने भी प्रेरित किया और शरीर ढकना शुरू हो गया। पिछले कुछ वर्षों में, विकासजी पौराणिक युग के वस्त्र, वाया विदेश हमारी सांस्कृतिक धरती पर पुन ले आए। अब महिलाएं उसी तरह के छोटे वस्त्र धारण करती हैं उस पर साड़ी का कम चौड़ा, पल्लु नुमा वस्त्र ओढती हैं।
वैसे इतना महंगा लहंगा और कपडे सिर्फ एक बार पहन कर कितने ही लोग, कुछ दिनों बाद लुटा हुआ सा महसूस करते हैं। क्यूंकि एक बार पहनी महंगी ड्रेस, अलमारी के पता नहीं किस कोने में तुड़ी मुड़ी परेशान पड़ी होती है। वह सोच रही होती है कि दो चार बार पहन ली जाती तो ज़्यादा अच्छा लगता। अब तो बंदों से भी जी भरने लग गया है, कपड़े तो कपड़े हैं। महिलाएं महंगे और पसंदीदा कपड़ों से भी बहुत जल्दी उब जाती हैं तो उन्हें बेच देने से पुरानों से निजात मिलेगी और नए खरीदने के लिए अवसर उगेंगे। कोई पोशाक अगर खरीद नहीं पाए कोई और खरीद ले गया फिर ऑनलाइन बिक रही होगी तो उसे खरीदकर तन और मन खुश कर सकेंगे। किसी को बताना थोड़ा ही है कि पुराना खरीदा है। नए ट्रेंड में शर्म भी तो छिप जाएगी।
वैसे भी अब मार्लिन मुनरो जैसी अपने आप उड़ते रहने वाली पोशाकें पसंद की जा रही हैं। इस तरह की ड्रेस बार बार बिकेगी तो ऐसी दूसरी पोशाकें पहनने की प्रवृति के लिए संतुष्टि के द्वार खुलेंगे। फलां ड्रेस पहले फलां ने पहनी है, जानकर तो खरीदने वालों की लाइन लग जाएगी। मनपसंद डिज़ाइनर वस्त्र पहनने का वक़्त आ गया है।
- संतोष उत्सुक