By रेनू तिवारी | Jun 18, 2026
तमिलनाडु विधानसभा में गुरुवार को राज्य के लंबे समय से चले आ रहे पारंपरिक प्रोटोकॉल का पालन करते हुए सदन की कार्यवाही की शुरुआत की गई। सत्र की शुरुआत राज्य गीत यानी तमिल एंथम 'तमिल थाई वाज़्थु' के गायन से हुई, जबकि इसका समापन राष्ट्रगान के साथ किया गया। यह घटनाक्रम मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान गानों के क्रम को लेकर उपजे एक बड़े राजनीतिक विवाद के ठीक एक महीने बाद सामने आया है। बृहस्पतिवार को विधानसभा सत्र में दशकों पुरानी परंपरा को दोहराया गया। तमिलनाडु में यह स्थापित परंपरा रही है कि सभी सरकारी और आधिकारिक कार्यक्रमों की शुरुआत तमिल भाषा की जननी की स्तुति में गाए जाने वाले गीत 'तमिल थाई वाज़्थु' से होती है, और समापन हमेशा राष्ट्रगान से किया जाता है।
234 सदस्यीय विधानसभा में विजय को बहुमत दिलाने में मदद करने वाले कई सहयोगियों ने इस फैसले पर सवाल उठाए। CPI के राज्य सचिव एम. वीरपांडियन ने तर्क दिया कि सरकारी कार्यक्रमों में 'तमिल थाई वाज़्थु' को हमेशा सर्वोच्च स्थान दिया गया है और उन्होंने सरकार से इस पर स्पष्टीकरण मांगा।
जहां VCK प्रमुख थोल थिरुमावलवन ने भी इस क्रम की आलोचना की, वहीं PMK के संस्थापक एस. रामदास ने सरकार से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि सरकारी कार्यक्रमों में तमिल स्तुति गीत को उचित महत्व मिलता रहे।
DMK ने भी कड़ा विरोध जताया। पार्टी के प्रवक्ता टी.के.एस. एलंगोवन ने आरोप लगाया कि राज्यपाल ने सबसे पहले 'वंदे मातरम' गाने पर जोर दिया था और दावा किया कि इस घटनाक्रम से संकेत मिलता है कि विजय BJP के करीब जा रहे हैं।
बढ़ती आलोचनाओं का सामना करते हुए, TVK नेता आधव अर्जुन ने विस्तृत स्पष्टीकरण जारी करते हुए जोर देकर कहा कि TVK सरकार बदले हुए क्रम का समर्थन नहीं करती है।
उन्होंने इस प्रारूप को "तमिलनाडु के लिए अनुपयुक्त" बताया और कहा कि कार्यक्रम में 'तमिल थाई वाज़्थु' को तीसरे स्थान पर रखे जाने के बाद पार्टी ने राजभवन के समक्ष आपत्ति जताई थी। अर्जुन के अनुसार, राजभवन ने पार्टी को सूचित किया कि गवर्नर को केंद्र सरकार द्वारा जारी नए सर्कुलर के अनुसार काम करना था।
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