भारत के Halal Certification को Oman की मंजूरी, आस्था का धंधा करने वालों का खेल होगा खत्म

By नीरज कुमार दुबे | Dec 20, 2025

देश-विदेश में वर्षों से हलाल सर्टिफिकेशन एक संगठित धंधा बन चुका है। कुछ निजी संस्थाएँ खुद को ‘धर्म का ठेकेदार’ घोषित कर मोटी फ़ीस के बदले हलाल सर्टिफिकेट जारी करती हैं वह भी बिना किसी सरकारी निगरानी, बिना पारदर्शिता और बिना जवाबदेही के। इन्हीं संस्थाओं को लेकर बार-बार यह गंभीर सवाल उठते रहे हैं कि उनके पास इकट्ठा हुआ पैसा आखिर जाता कहाँ है। जाँच एजेंसियों और सुरक्षा विशेषज्ञों ने भी आगाह किया है कि जब पैसा बिना नियंत्रण के बहे, तो वह टैरर फंडिंग जैसे खतरनाक रास्तों पर भी जा सकता है।

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लेकिन अब इस खेल पर ब्रेक लगने लगा है। भारत सरकार ने आधिकारिक, सरकार-मान्य और अंतरराष्ट्रीय रूप से स्वीकार्य हलाल प्रमाणन को लागू कर उस पूरे नेटवर्क की जड़ पर चोट की है, जो आस्था की आड़ में कारोबार और संभावित रूप से आतंकी फंडिंग का रास्ता खोलता रहा। ओमान द्वारा भारत के सरकारी हलाल सर्टिफिकेट को मान्यता दिया जाना सिर्फ़ निर्यातकों के लिए राहत नहीं है, यह उस अनियंत्रित सिस्टम के खिलाफ सीधी कार्रवाई है, जिसे अब तक कोई छूने की हिम्मत नहीं कर रहा था। यह कदम साफ़ संदेश देता है कि आस्था का सम्मान होगा, लेकिन आस्था के नाम पर लूट, दलाली और संदिग्ध फंडिंग अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

हम आपको बता दें कि भारत ने अपने निर्यात हितों को साधने और वैश्विक बाज़ार में धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप व्यापार को सुव्यवस्थित करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया है कि भारत उन सभी देशों से मिशन मोड में संवाद कर रहा है, जहाँ मांस और मांस उत्पादों के निर्यात के लिए हलाल प्रमाणन अनिवार्य है। इस कड़ी में ओमान के साथ हाल ही में हस्ताक्षरित भारत–ओमान व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (CEPA) एक अहम मील का पत्थर साबित हुआ है।

पीयूष गोयल ने बताया है कि ओमान पहला ऐसा देश बन गया है जिसने आधिकारिक रूप से भारत के हलाल मांस प्रमाणन को मान्यता दी है। हम आपको बता दें कि इससे पहले खाड़ी देशों और अन्य इस्लामिक देशों में हलाल प्रमाणन के नाम पर अनौपचारिक और अपारदर्शी प्रक्रियाएँ चल रही थीं। भारत पिछले तीन–चार वर्षों से प्रयास कर रहा था कि इन देशों को औपचारिक और सरकार स्वीकृत हलाल प्रमाणन प्रणाली अपनाने के लिए राज़ी किया जाए।

इस समझौते के तहत ओमान भारत के हलाल प्रमाणन को सीधे स्वीकार करेगा, जिससे दोहराव वाली जाँच, अतिरिक्त प्रमाणन और अनावश्यक लागत से भारतीय निर्यातकों को राहत मिलेगी। इससे न केवल निर्यात लागत घटेगी, बल्कि भारतीय उत्पादों की बाज़ार तक पहुँच भी तेज़ और आसान होगी। पीयूष गोयल ने साफ शब्दों में कहा कि भारत अब सभी 55 इस्लामिक देशों के साथ इसी तरह की व्यवस्था लागू कराने के लिए सक्रिय बातचीत करेगा।

देखा जाये तो भारत ने अब साफ कर दिया है कि धार्मिक मान्यताओं का सम्मान होगा, लेकिन अव्यवस्था और दलाली की कीमत पर नहीं। औपचारिक और प्रक्रिया आधारित हलाल प्रमाणन की बात दरअसल भारत के उस इरादे का संकेत है, जिसमें वह आस्था को पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ जोड़ना चाहता है। यह उन तमाम आलोचकों के लिए भी जवाब है, जो हलाल को लेकर या तो अंध-विरोध करते हैं या फिर आंख मूंदकर उसका समर्थन करते हैं।

आर्थिक दृष्टि से देखें तो खाड़ी और इस्लामिक देश भारत के लिए कोई मामूली बाज़ार नहीं हैं। मांस, खाद्य प्रसंस्करण और ऑर्गेनिक उत्पादों में ये देश बड़े आयातक हैं। यदि भारत अपने प्रमाणन को इन बाज़ारों में मान्य करा लेता है, तो यह सिर्फ़ निर्यात बढ़ाने का मामला नहीं होगा, यह वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की साख मज़बूत करने का मामला होगा।

सबसे अहम बात यह है कि यह पहल भारत को ‘रिएक्टिव’ से ‘प्रोएक्टिव’ बना रही है। अब भारत दूसरों के बनाए नियमों को चुपचाप स्वीकार करने वाला देश नहीं, बल्कि अपने मानकों को आत्मविश्वास से पेश करने वाला खिलाड़ी बन रहा है। हलाल प्रमाणन का यह कदम दरअसल एक बड़े संदेश का हिस्सा है यानि भारत अब वैश्विक व्यापार में बराबरी से बात करेगा, न झुकेगा, न हिचकेगा। बहरहाल, असली परीक्षा तब होगी जब भारत बाकी 54 इस्लामिक देशों में भी इसी तरह की औपचारिक मान्यता हासिल करेगा। तब यह कहा जा सकेगा कि भारत ने न सिर्फ़ व्यापार जीता, बल्कि व्यवस्था भी।

-नीरज कुमार दुबे

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