By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 15, 2026
जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शनिवार को कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेताओं द्वारा 80 वर्ष पहले भारत में विलय का लिया गया ऐतिहासिक फैसला “सही निर्णय” था। उमर अब्दुल्ला ने जम्मू कश्मीर के विशेष दर्जे और राज्य का दर्जा बहाल करने की अपनी मांग दोहराते हुए कहा कि यह देश के संघीय ढांचे को कायम रखने के लिए आवश्यक है। उमर अब्दुल्ला ने यहां बख्शी स्टेडियम में आयोजित मुख्य स्वतंत्रता दिवस समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि अगर 2019 में अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त नहीं किया गया होता, तो आज पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के लोग जम्मू-कश्मीर के साथ फिर से जुड़ने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे होते।
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के निवासियों की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताते हुए अब्दुल्ला ने कहा कि भारत उन्हें अपना ही नागरिक मानता है। उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पीओके के प्रतिनिधियों के लिए सीटें आरक्षित हैं और उम्मीद है कि एक दिन वे इन सीटों पर बैठेंगे। उन्होंने कहा, “अगर 2019 में हमारी स्थिति नहीं बदली गई होती, तो नियंत्रण रेखा के उस पार जम्मू-कश्मीर के उस हिस्से के लोग आज हमारे साथ फिर से जुड़ने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे होते।” उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर की मूल संवैधानिक गारंटियों और राज्य के दर्जे की बहाली भारतीय संघवाद की भावना को फिर से मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण है।
अब्दुल्ला ने लोगों को भरोसा दिलाया कि उनकी सरकार उनके हितों की सेवा करने और क्षेत्र के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वालों के सपनों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि शहीदों की विरासत का सम्मान करने का अर्थ उनकी आकांक्षाओं को पूरा करना है, जिसमें राज्य का दर्जा बहाल करना, जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा और संवैधानिक संरक्षण वापस हासिल करना तथा विकास के नए दौर की शुरुआत करना शामिल है। उन्होंने कहा, “उस बलिदान का सम्मान करने के लिए हम उन सपनों को साकार करेंगे, जो वे अपनी विरासत के रूप में हमारे लिए छोड़ गए हैं—चाहे विशेष दर्जा वापस हासिल करना हो, जम्मू-कश्मीर के लिए संवैधानिक गारंटियां बहाल करना हो, राज्य का दर्जा वापस पाना हो या प्रगति के नए दौर की शुरुआत करना हो।” मुख्यमंत्री ने लोकतंत्र और संघवाद को देश के दो सबसे बड़े स्तंभ बताया।
उन्होंने कहा, “हमारा देश राज्यों का संघ है। संघवाद को बचाने और मजबूत करने के लिए हमें जम्मू-कश्मीर से शुरुआत करनी होगी। हमसे जो कुछ छीना गया है, उसे वापस किया जाना चाहिए, ताकि हमारी पहचान केवल शब्दों तक सीमित न रहे, बल्कि उसे व्यवहार में भी उतारा जाए।” केंद्रीकृत शासन व्यवस्था का जिक्र करते हुए अब्दुल्ला ने आगाह किया कि जब केंद्रीय एजेंसियां राज्यों की स्वायत्तता को कमजोर करती हैं तो संघवाद प्रभावित होता है।
उन्होंने नीट और जेईई जैसी केंद्रीकृत प्रवेश परीक्षाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि आईआईटी और आईआईएम जैसे राष्ट्रीय संस्थानों के लिए केंद्रीय परीक्षाएं उचित हैं, लेकिन राज्य संचालित शिक्षण संस्थानों को अपने दाखिले खुद आयोजित करने का अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने कहा, “जब राज्यों के अधिकारों को खोखला किया जाता है तो इसका असर सड़कों पर दिखाई देता है।” उन्होंने हाल में दिल्ली और जम्मू-कश्मीर में हुए सार्वजनिक विरोध प्रदर्शनों तथा छात्रों के आंदोलनों को व्यवस्था के स्तर पर जरूरत से अधिक हस्तक्षेप से जोड़ते हुए यह बात कही। मुख्यमंत्री ने पारदर्शी और योग्यता आधारित भर्ती तथा जनता के प्रति जवाबदेह शासन का वादा करते हुए लोगों को आश्वस्त किया कि उनकी सरकार उनकी आकांक्षाओं को पूरा करने और युवाओं को “अंधकार से प्रकाश की ओर” ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है।