By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Jul 31, 2026
उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनसे अलग रह रहीं उनकी पत्नी पायल अब्दुल्ला के विवाह विच्छेद को मंजूरी दे दी। न्यायालय ने दोनों पक्षों की उस दलील का संज्ञान लिया जिसमें उन्होंने कहा कि वे अपनी अपनी जिंदगी में खुश हैं। न्यायालय ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल की दलीलों पर ध्यान दिया।
मामला सुलझ गया है। अनुच्छेद 142 के तहत अर्जी दाखिल कर दी गई है। माननीय न्यायाधीशगण तलाक मंजूर कर सकते हैं।” पीठ ने पूछा, “यह अर्जी कब दर्ज हुई?” बताया गया कि अर्जी 22 जुलाई को दाखिल की गई थी।
सिब्बल ने कहा, “बाकी सभी मामले वापस ले लिए जाएंगे। यह सब (आवेदन में) बताया गया है।” पीठ दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी जिनमें उमर अब्दुल्ला की ओर से क्रूरता के आधार पर तलाक की मांग वाली याचिका भी शामिल थी। उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली उच्च न्यायालय के एक आदेश को चुनौती देने वाली उमर अब्दुल्ला की याचिका पर जुलाई 2024 में पायल अब्दुल्ला से जवाब मांगा था।
उच्च न्यायालय ने 12 दिसंबर 2023 को उमर अब्दुल्ला की तलाक की अर्जी यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि उनकी अपील में कोई दम नहीं था। अदालत ने उन्हें तलाक की डिक्री देने से इनकार करने वाले 2016 के कुटुंब अदालत के आदेश को बरकरार रखा था। कुटुंब अदालत ने 30 अगस्त 2016 को उमर अब्दुल्ला की याचिका खारिज कर दी थी।
अदालत ने कहा कि वह “क्रूरता” या “परित्याग” (साथ छोड़ देने) के अपने दावों को साबित नहीं कर पाए, जो तलाक की डिक्री पाने के लिए उनके द्वारा बताए गए आधार थे। तलाक की अपनी अर्जी में, उमर अब्दुल्ला ने कुटुंब अदालत में दावा किया था कि उनकी शादी पूरी तरह से टूट चुकी है और 2007 से उनके बीच कोई वैवाहिक संबंध नहीं रहा है; साथ ही एक सितंबर 1994 को हुई शादी के बाद यह जोड़ा 2009 से अलग-अलग रह रहा है। अधीनस्थ अदालत में दायर याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि पायल ने उमर अब्दुल्ला के साथ “अनुचित व्यवहार” किया, जिससे राजनेता को पीड़ा और उत्पीड़न का सामना करना पड़ा।
दिल्ली उच्च न्यायालय की एकल न्यायाधीश पीठ ने अगस्त 2023 में उमर अब्दुल्ला को अलग रह रही अपनी पत्नी को हर महीने 1.5 लाख रुपये का अंतरिम गुजारा-भत्ता देने का आदेश दिया था। उन्हें उनके दोनों बेटों में से हर एक की पढ़ाई के लिए भी हर महीने 60,000 रुपये देने का आदेश दिया गया। उच्च न्यायालय का यह आदेश पायल अब्दुल्ला और उनके बेटों की उन याचिकाओं पर आया था जो अधीनस्थ अदालत के 2018 के आदेशों के खिलाफ दायर की गई थीं।
इन आदेशों में उन्हें पायल को 75,000 रुपये और बच्चों के बालिग होने तक उन्हें 25,000 रुपये का अंतरिम गुजारा-भत्ता देने की बात कही गई थी।