By नीरज कुमार दुबे | Jun 12, 2026
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने गुरुवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर राज्य का दर्जा बहाल करने समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब जम्मू-कश्मीर में राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग लगातार तेज हो रही है और सभी राजनीतिक दल केंद्र सरकार से इस संबंध में जल्द फैसला लेने की अपील कर रहे हैं। इस मुद्दे को लेकर जम्मू-कश्मीर में सत्तारुढ़ नेशनल कांफ्रेंस राष्ट्रीय राजधनी दिल्ली में एक बड़ा प्रदर्शन करने की तैयारी में भी है।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लगातार 12 वर्ष तक पद पर बने रहने की उपलब्धि के लिए बधाई भी दी। उमर अब्दुल्ला की यह टिप्पणी राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है क्योंकि विपक्षी दलों के कई नेता केंद्र सरकार की नीतियों पर लगातार हमलावर रहे हैं, जबकि उमर ने कई मुद्दों पर संतुलित और सहयोगात्मक रुख अपनाया है। उमर अब्दुल्ला की यह टिप्प्णी इसलिए भी चर्चा का विषय बनी हुई है क्योंकि उन्होंने हाल ही में दिल्ली में विपक्षी गठबंधन इंडिया की बैठक में हिस्सा लिया था जिसमें मोदी सरकार को घेरने की रणनीति बनाई थी।
प्रधानमंत्री से मुलाकात से एक दिन पहले उमर अब्दुल्ला ने केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से भी नई दिल्ली में मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने कश्मीर घाटी में रेल सेवाओं को और मजबूत करने की मांग उठाई। विशेष रूप से उन्होंने अक्टूबर में श्रीनगर हवाई अड्डे के 16 दिनों तक बंद रहने की अवधि को देखते हुए अतिरिक्त रेल सेवाएं शुरू करने का अनुरोध किया। जानकारी के अनुसार उस समय हवाई अड्डे पर रनवे की मरम्मत और रखरखाव का काम किया जाएगा, जिससे हवाई यातायात प्रभावित हो सकता है। ऐसे में मुख्यमंत्री ने यात्रियों की सुविधा के लिए रेल सेवाओं के विस्तार पर जोर दिया।
इसी बीच, उमर अब्दुल्ला के हालिया बयान ने राष्ट्रीय राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और उसके कारण वैश्विक स्तर पर ईंधन संकट की आशंकाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि भारत की स्थिति कई अन्य देशों की तुलना में बेहतर है। उन्होंने कहा कि यूरोप के कुछ हिस्सों में विमानन ईंधन सीमित मात्रा में दिया जा रहा है, जबकि पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देश में विमानों को ईंधन उपलब्ध कराने में कठिनाइयां सामने आ रही हैं। इसके मुकाबले भारत की स्थिति काफी बेहतर है। हालांकि उन्होंने उम्मीद जताई कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध जल्द समाप्त होगा ताकि वैश्विक स्तर पर पैदा हो रही चिंताओं का समाधान हो सके।
उमर अब्दुल्ला के इस बयान की केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने खुलकर सराहना की। रिजिजू ने उन्हें एक समझदार नेता बताते हुए कहा कि कुछ लोगों को उमर अब्दुल्ला से सीख लेनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि वैचारिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन राष्ट्रीय संकट के समय सभी को एकजुट होकर देशहित में सोचने की जरूरत होती है। रिजिजू की यह टिप्पणी इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि देश की राजनीति में अलग अलग दलों के नेताओं के बीच इस तरह की सार्वजनिक सराहना कम ही देखने को मिलती है।
बहरहाल, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उमर अब्दुल्ला का हालिया रुख जम्मू कश्मीर की राजनीति में एक संतुलित और व्यावहारिक दृष्टिकोण को दर्शाता है। एक ओर वह राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को मजबूती से उठा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर संतुलित बयान देकर संवाद और सहयोग की राजनीति को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं।