राम मंदिर के चंदे में घपले की कहानी, क्या सच में चढ़ावे से 'चंपत' हो गए 7 करोड़ रुपए?

By अभिनय आकाश | Jun 12, 2026

राम जन्मभूमि भारतीय इतिहास का सबसे पुराना और जटिल मुद्दा है, जिसको लेकर आज भी लोग बात करते हैं तो सेंसेटिव हो जाते हैं। इस एक विवाद की वजह से सिर्फ अयोध्या में ही नहीं बल्कि पूरे भारत में दंगे हुए और इसमें हजराों लोगों की जान गई। ये एक ऐसा केस था, जहां पर भगवान राम खुद अपना केस लड़ते हैं। सुप्रीम कोर्ट के अंदर बकायदा उनकी फाइल बनती है। करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र अयोध्या का राम मंदिर जिसके निर्माण के लिए कई सालों तक कानूनी लड़ाई लड़ी गई। भक्तों की आस, कार्तिक के मास में रामलला का वनवास खत्म हो जाता है। रामलला के नाम जमीन के हक पर सुप्रीम हस्ताक्षर के साथ ही बड़े धूम धाम के साथ इसकी आधारशीला रखी गई और फिर मंदिर बनकर तैयार हो गया। जिसके उद्घाटन को पूरे देश ने एक ऐतिहासिक पल की तरह देखा। लेकिन अब इसी राम मंदिर को लेकर एक ऐसा विवाद सामने आया है जिसने राजनीति से लेकर आम श्रद्धालुओं तक हर किसी का ध्यान अपनी तरफ खींच लिया है। दावा किया जा रहा है कि मंदिर में आने वाले चढ़ाने और दान के हिसाब-किताब में घड़बड़ी हुई है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि राम मंदिर में आए चढ़ावे में पांच करोड़ से लेकर 7 करोड़ तक की कथित चोरी हुई है। भाजपा के ही नेता और पार्टी प्रवक्ता रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मामले की सीबीआई या किसी अन्य केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने की मांग की है। अब इन दावों को लेकर प्रधानमंत्री कार्यलय यानी पीएमओ ने भी संज्ञान लिया है। वहीं दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी और उसके प्रमुख अखिलेश यादव लगातार इस मुद्दे को उठा रहे हैं। उनका कहना है कि अगर सबकुछ ठीक है तो पूरे मामले की पारदर्शी जांच होनी चाहिए। जबकि राम मंदिर ट्रस्ट इन सभी आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बता रहा है। तो आखिर क्या है पूरा मामला? क्या वाकई राम मंदिर के चढ़ावे में कोई घोटाला हुआ है?  पीएमओ तक पहुंचे इस पूरे विवाद की शुरुआत आखिर हुई कैसे? आज का एमआरआई हम इस पूरे मामले की टाइमलाइन, आरोपों, ट्रस्ट के जवाब और अब तक सामने आए तथ्यों को विस्तार से करेंगे। 

पूरे मामले में समाजवादी पार्टी की एंट्री

इस मामले ने राजनीतिक रंग पकड़ा समाजवादी पार्टी के दावे के बाद। सपा सरकार में मंत्री रह चुके पवन पांडे ने दावा किया कि राम मंदिर से 5 से 7.5 करोड़ तक की चोरी की गई है। ऐसा उन्होंने आरोप लगाया। सपा प्रमुख और उत्तर प्रदेश के पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने भी कहा कि इस मामले पर सरकार की चुप्पी संदिग्ध है और मंदिर ट्रस्ट की तरफ से भी कोई सफाई देने के लिए सामने नहीं आना चाहता। मंदिर ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय ने इस पर सफाई दी। कहा कि समय-समय पर ऑडिट होता रहता है। आजकल यही काम चल भी रहा है। अब तक दान के पैसों में हेराफेरी की कोई बात सामने नहीं आई है। चंपत राय की सफाई के बाद अखिलेश यादव ने सरकार से 11 सवाल पूछे। पूछा कि सीसीटीवी का सबूत सार्वजनिक करके मामले की सच्चाई बताने में आखिर परेशानी क्या है? मामला बढ़ा तो भारतीय जनता पार्टी के नेता डॉ. रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री को लेटर लिखकर सीबीआई जांच की मांग की। 10 जून को पीएमओ ने मंदिर ट्रस्ट से मामले की जांच रिपोर्ट भी मांग ली। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, राम मंदिर में शिला पूजन के समय से चोरी जारी है। निर्माण शुरू हुआ तो दो-दो मिनट में प्लॉट की कीमतें करोड़ों बढ़ गई। वहां चंपत राय बैठे हैं... 'चंपत' का मतलब ही होता है 'लेकर भाग जाना।' आपको समझ जाना चाहिए।

ट्रस्ट का गठन कैसे हुआ

राम मंदिर ट्रस्ट पर लगे आरोपों को समझने से पहले यह जानना जरूरी है कि यह ट्रस्ट बना कैसे था। दरअसल नवंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मामले पर अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। इसके बाद केंद्र सरकार को राम मंदिर के निर्माण और उसके प्रबंधन के लिए एक ट्रस्ट बनाने का निर्देश दिया गया। इसी के बाद 5 फरवरी 2020 को केंद्र सरकार ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन की घोषणा की। यही ट्रस्ट आज राम मंदिर के निर्माण, उसके रखरखाव, मंदिर में आने वाले दान और पूरे राम जन्मभूमि परिसर के प्रबंधन की जिम्मेदारी संभाल रहा है। ट्रस्ट बनने के कुछ दिनों बाद इसकी पहली बैठक हुई। इसमें महंत नृत्य गोपाल दास को ट्रस्ट का अध्यक्ष चुना गया। जबकि चंपत राय को महासचिव बनाया गया। इसके बाद राम मंदिर निर्माण का काम तेजी से आगे बढ़ने  लगा। देश भर के लोगों ने खुलकर दान दिया। किसी ने ₹100 दिए, किसी ने हजारों और लाखों रुपए दिए। बड़े उद्योगपति से लेकर आम श्रद्धालुओं तक लाखों लोगों ने मंदिर निर्माण में योगदान दिया। फिर 22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हुई। इसके बाद अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में जबरदस्त बढ़ोतरी देखने को मिली।

राम मंदिर में कितना दान आता है 

इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक वित्तीय वर्ष 204-25 में ट्रस्ट को कुल ₹327 करोड़ मिले। यह डाटा राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्टकी सालाना रिपोर्ट में बताया गया है। ₹327 करोड़ में से 153 करोड़ श्रद्धालुओं के दान से आए। जबकि लगभग ₹173 करोड़ बैंक में जमा रकम और निवेश पर मिले ब्याज के थे। सिर्फ दान की बात करें तो मंदिर में रोजाना औसतन करीब 42 लाख का चढ़ावा आता है। यानी हर घंटे लगभग ₹175000 और हर मिनट करीब ₹2900 से भी ज्यादा और जब त्यौहार हो या कोई खास मौका हो, बड़ा मौका हो तो यह आंकड़ा और भी बढ़ जाता है। मंदिर के उद्घाटन वाले दिन ही लगभग 3 करोड़ 17 लाख का दान आया था। इस बात से आप अंदाजा लगा सकते हैं कि यहां कितनी बड़ी मात्रा में दान आता है, नकदी आती है। राम जन्मभूमि परिसर में अलग-अलग जगहों पर करीब 40 दान पेटियां रखी गई हैं। इसके अलावा ऑनलाइन दान की भी व्यवस्था है। दान पेटियों से निकली नगदी को तय प्रोसीजर के तहत एक सुरक्षित और गोपनीय कक्ष में ले जाया जाता है। वहां सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में इसकी गिनती होती है। इस काम में ट्रस्ट के प्रतिनिधि और बैंक से जुड़े कर्मचारी शामिल रहते हैं। जानकारी के मुताबिक दान की गिनती की जिम्मेदारी स्टेट बैंक ऑफ इंडिया को दी गई है। बैंक ने इसके लिए एक निजी एजेंसी के कर्मचारियों को भी नियुक्त किया हुआ है। नोट गिनने की मशीनों और सिक्कों की मैनुअल गिनती के जरिए पूरी रकम का हिसाब किया जाता है। कई बार गिनती या नगदी इतनी ज्यादा होती है कि गिनती का काम 24 घंटे तक भी चलता रहता है। गिनती पूरी होने के बाद रकम को सुरक्षा के बीच बैंक में जमा करा दिया जाता है।  

ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने इन सभी आरोपों को खारिज किया है। इनका कहना है कि मंदिर के चढ़ावे और दान का नियमित ऑडिट होता है। इस प्रक्रिया में ट्रस्ट के प्रतिनिधियों के साथ बैंक के अधिकारी भी शामिल रहते हैं। चंपत राय के मुताबिक दान और चढ़ावे का पूरा रिकॉर्ड रखा जाता है और अब तक हुए हर ऑडिट में ऐसी कोई बात सामने नहीं आई जिससे करोड़ों रुपए की चोरी की पुष्टि होती हो। यानी एक तरफ विपक्ष और कुछ नेताओं द्वारा सवाल उठाए जा रहे हैं तो दूसरी तरफ ट्रस्ट का कहना है कि पूरी व्यवस्था तय नियमों के अनुसार चल रही है और आरोपों का कोई आधार नहीं है। यानी इस समय तक स्थिति यह है कि आरोप लगाए जा चुके हैं। राजनीतिक बयान आ चुके हैं। जांच की मांग उठ चुकी है और अब मामला प्रधानमंत्री कार्यालय तक भी पहुंच चुका है। लेकिन अभी तक किसी भी सरकारी एजेंसी ने सार्वजनिक रूप से यह नहीं कहा कि राम मंदिर के चढ़ावे में चोरी साबित हुई है। फिलहाल राम मंदिर के चढ़ावे के गबन से जुड़ा यह आरोप पीएमओ तक भी पहुंच चुका है। 

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