By अभिनय आकाश | Oct 24, 2026
ऑपरेशन सिंदूर के बाद से भारत की ब्रह्मोस मिसाइल की अंतरराष्ट्रीय मांग लगातार चर्चा में रही है। पाकिस्तान के कई एयरबेस को खाक में मिलाने वाली इस मिसाइल को मुस्लिम देशों ने भी खरीदा है। इसी बीच चार मुस्लिम देशों पाकिस्तान, तुर्की, क़तर और इंडोनेशिया ने दोहा में रक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए भद्र मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग पर हस्ताक्षर किए। इस भद्र नाम से जुड़े समझौते की खबरों ने यह भी सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या इसका असर भारत की ब्रह्मोस मिसाइल की संभावित विदेशी बिक्री पर पड़ सकता है? इस समझौते का मकसद सैन्य उत्पादन, रक्षा क्षमताओं और तकनीकी प्रशिक्षण के क्षेत्र में चारों देशों के बीच सहयोग बढ़ाना है। भारत इंडोनेशिया की मिसाइल डील पर क्यों उठे सवाल? भारत ने जुलाई में इंडोनेशिया के साथ करीब 63 करोड़ डॉलर के दो प्रमुख रक्षा समझौते किए थे। इसके तहत इंडोनेशिया को ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल और अस्त्र एयर टू एयर मिसाइल बेचने का करार हुआ था। इन चार देशों के नए रक्षा समझौते के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या इंडोनेशिया की पाकिस्तान और तुर्की के साथ बढ़ती रक्षा साझेदारी का असर भारत के साथ हुए इन करारों पर पड़ सकता है?
अहलावत ने भद्र एमओयू को काम के बंटवारे से जुड़ी व्यवस्था बताया। उनके अनुसार यह समान इस्लामी पहचान वाले देशों के बीच रक्षा अनुसंधान एवं विकास में तालमेल बढ़ाने की पहल है। उन्होंने कहा कि भारत को इस समझौते पर नजर रखनी चाहिए। लेकिन इससे घबराने की जरूरत नहीं है। पाकिस्तान, तुर्की, कतर और इंडोनेशिया ने 21 अक्टूबर को कतर की राजधानी दोहा में बद्र नाम की बहुपक्षीय रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसका उद्देश्य चारों देशों के बीच रक्षा उद्योग, सैन्य उत्पादन, तकनीकी प्रशिक्षण और अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना है। इसकी पुष्टि कतर की सरकारी समाचार एजेंसी और तुर्की की सरकारी समाचार एजेंसी ने भी की है।