ज्ञानवापी मामला: मस्जिद हटाने के लिए इकलौते जीवित पक्षकार ने दिया था जमीन देने का प्रस्ताव, मुस्लिम पक्ष ने कहा- हम उनसे कभी नहीं मिले

By अनुराग गुप्ता | Jun 03, 2022

वाराणसी। वाराणसी के ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी मामला अदालत में है और अब 4 जुलाई को सुनवाई होगी। अदालत में मामले की सुनवाई करने के औचित्य संबंधी याचिका पर मुस्लिम पक्ष की जिरह चल रही है। गर्मी की छुट्टी होने की वजह से अदालत 4 जुलाई को मामले की अगली सुनवाई करेगा। इसी बीच अदालत की चौखट पर मामले को पहली बार लाने वाले इकलौते जीवित पक्षकार हरिहर पांडे का बयान सामने आया है। जिसमें उन्होंने कहा कि पिछले साल मुस्लिम पक्ष उनके घर पर एक गुजारिश लेकर आया था। 

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हिंदू न्यूज वेबसाइट 'दैनिक भास्कर' की रिपोर्ट के मुताबिक, हरिहर पांडे ने बताया कि साल 2021 में प्रतिवादी पक्ष मेरे घर पर हाई कोर्ट का एक नोटिस लेकर आया था और मुझसे पूछा था कि यह मामला आपस में सुलझाने का क्या कोई विकल्प है। इस पर मैंने कहा था कि आप लोग चाहते है कि मस्जिद बरकरार रहे और मैं चाहता हूं कि मस्जिद हटे। ऐसे में यही विकल्प है कि आप लोग मेरी 8 एकड़ जमीन ले लीजिए और वहां पर मस्जिद बनवा लीजिए।

इसी बीच हरिहर पांडे ने बताया कि उन्होंने अपनी 8 एकड़ जमीन की रजिस्ट्री भी कराने की बात कही थी। उन्होंने कहा कि मैं 5-8 एकड़ जमीन देने के लिए तैयार हूं लेकिन मस्जिद उस मंदिर पर नहीं रहेगा। हालांकि मस्जिद की देखरेख करने वाली संस्था अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी के सयुंक्त सचिव एमएस यासीन ने बताया कि वो अभी तक हरिहर पांडे से मिले ही नहीं है। यह बात बिल्कुल गलत है, हम उनसे कभी नहीं मिले हैं। कैसे वो इस तरह का दावा कर रहे हैं हम यह भी नहीं जानते हैं।

आपको बता दें कि हरिहर पांडे समेत 3 लोगों ने साल 1991 में ज्ञानवापी मामले को लेकर अदालत का रुख किया था। हालांकि कुछ सालों बाद हरिहर पांडे को छोड़कर बाकी बचे सोमनाथ व्यास और रामरंग शर्मा की मौत हो गई थी। ऐसे में महज हरिहर पांडे भी इस मामले के इकलौते जीवित पक्षकार हैं। 

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ज्ञानवापी परिसर का कराया गया था सर्वे

अदालत के निर्देश पर ज्ञानवापी परिसर का वीडियोग्राफी सर्वे कराया गया था। यह सर्वे तीन दिनों तक चला था। जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था, जहां पर मामले को वाराणसी की जिला अदालत को ट्रांसफर कर दिया गया था लेकिन अदालत में अभी भी मामला सुनवाई करने के औचित्य के मुद्दे पर उलझा हुआ है। हालांकि अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि परिसर की वीडियोग्राफी सर्वे की रिपोर्ट मामले के सभी पक्षों को उपलब्ध कराई जाएगी, मगर इसके लिए क्या शर्ते होंगी वह अदालत ही बताएगी।

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