OP Nayyar Birth Anniversary: हिंदी सिनेमा के हाइएस्ट पेड संगीतकार थे ओपी नय्यर, गाने के शौक से छूटा था घर

By अनन्या मिश्रा | Jan 16, 2025

आज ही के दिन यानी की 16 जनवरी को जाने-माने संगीतकार ओमकार प्रसाद नय्यर का जन्म हुआ था। वह एक ऐसे संगीतकार थे, जिनके गाने सुनना लोगों को आज भी पसंद करते हैं। आज भी नय्यर के गाने लोगों को सुकून देते हैं। शानदार गानों के लिए ओपी नैय्यर को सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक का फिल्मफेयर और नेशनल पुरस्कार मिल चुका है। तो आइए जानते हैं उनकी बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर संगीतकार ओपी नय्यर के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...


जन्म और परिवार

अविभाजित भारत के लाहौर में 16 जनवरी 1926 को ओमकार प्रसाद नय्यर का जन्म हुआ था। उनको बचपन से ही संगीत में रुचि थी। लेकिन नय्यर के परिवार के लोग उनको संगीत की तरफ से जाने से रोकते थे। लेकिन ओपी नय्यर को ऐसा लगता था कि अगर वह संगीत से दूर हो गए, तो उनका पढ़ाई में मन नहीं लगेगा। नय्यर के मन में संगीत भर चुका था। ऐसे में उन्होंने 17 साल की उम्र में एचएमवी के लिए कबीर वाणी कंपोज की थी, लेकिन वह खास पसंद नहीं की गई। इसके बाद उनको एक प्राइवेट एल्बम 'प्रीतम आन मिलो' कंपोज किया। इसमें सी.एच आत्मा ने आवाज दी थी।

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हाइएस्ट पेड संगीतकार

बता दें कि ओमकार प्रसाद नय्यर इंडस्ट्री के हाइएस्ट पेड संगीतकार में से एक थे। उनको इंडस्ट्री में ओपी नय्यर के नाम से जाना जाता था। वह एक ऐसे संगीतकार रहे हैं, जिन्होंने शास्त्रीय संगीत की विधिवत शिक्षा नहीं ली थी। लेकिन जब वह किसी गीत के लिए संगीत तैयार करते थे, तो उसमें वह रागों का इतनी खूबसूरती से इस्तेमाल किया करते थे कि लोगों को यह अंदाजा नहीं होता था कि उन्होंने रागों की व्यवस्थित शिक्षा नहीं प्राप्त की है।


लता मंगेशकर के साथ नहीं बनाया गाना

दरअसल, यह बड़ा दिलचस्प किस्सा है, साल 1952 में आई फिल्म 'आसमान' के लिए नय्यर ने लता मंगेशकर से गाना बनवाने का प्रयास किया था। वह चाहते थे कि लता मुख्य अभिनेत्री की बजाय सहायक अभिनेत्री के लिए गाना गाएं। लेकिन लता मंगेशकर ने ऐसा करने से मना कर दिया। इसके बाद फिर ओपी नय्यर ने फैसला किया कि वह लता मंगेशकर से साथ कोई गाना नहीं बनाएंगे।


ओपी नय्यर की बार करें, तो वह एक ऐसे संगीतकार थे। जिन्होंने सितार, गिटार, हारमोनियम, बांसुरी, तबला, संतूर, ढोलक, माउथआर्गन और सेक्सोफोन आदि का जमकर इस्तेमाल किया। इन वाद्ययंत्रों के साथ जब वह प्रयोग करते थे, तो वह गीत के एक-एक शब्द का ध्यान रखते थे। बहुत कम लोग इस बात को जानते हैं कि वह होम्योपैथ और ज्योतिष के भी अच्छे जानकार थे।

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