By नीरज कुमार दुबे | Aug 26, 2026
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत से बुरी तरह पिटने वाला पाकिस्तान आज भी उस सैन्य झटके के जख्म सहलाता नजर आता है, जबकि दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय रक्षा विशेषज्ञ लगातार इस बात का आकलन कर रहे हैं कि भारत ने किस सूझबूझ, सटीक रणनीति और सैन्य तैयारी के साथ उस अभियान को अंजाम दिया था। आतंकवादी ठिकानों पर सटीक हमलों से लेकर पाकिस्तान के अहम सैन्य प्रतिष्ठानों तक पहुंच बनाने और परिस्थितियों के अनुसार लक्ष्य बदलने की क्षमता ने भारतीय सैन्य अभियान की रणनीतिक गहराई को सामने रखा। अब इसी सिलसिले में पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान का एक चौंकाने वाला बयान सामने आया है, जिसने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत की सैन्य योजना और पाकिस्तान के भीतर तय किए गए संभावित लक्ष्यों को लेकर कई अहम परतें खोल दी हैं।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। जनरल चौहान ने दो और संभावित लक्ष्यों की पहचान करने को कहा। इनमें एक नाम था गिलगित-बाल्टिस्तान के स्कार्दू एयरबेस का। भारतीय सैन्य नेतृत्व ने इस लक्ष्य को भी मंजूरी दी थी। यानी भारत की निगाह सिर्फ एक ठिकाने तक सीमित नहीं थी। सरगोधा के बाद स्कार्दू भी भारतीय सैन्य योजना के दायरे में आ चुका था। हालांकि, स्कार्दू के ऊपर खराब मौसम ने योजना में बाधा डाल दी। इसके बाद लक्ष्य बदला गया और भोलारी को चुना गया। यह घटनाक्रम भारत की सैन्य रणनीति की एक महत्वपूर्ण विशेषता को दिखाता है कि परिस्थितियां बदलें तो भी अभियान रुकता नहीं, विकल्प तुरंत सक्रिय हो जाते हैं। देखा जाये तो युद्धक्षेत्र में मौसम, तकनीकी परिस्थितियां और वास्तविक समय की सूचनाएं फैसलों को प्रभावित करती हैं, लेकिन पहले से तैयार सेनाएं इन्हीं परिस्थितियों के बीच अपना रास्ता निकालती हैं और भारतीय सैन्य बल इसमें पूरी तरह दक्ष हैं।
देखा जाये तो ऑपरेशन सिंदूर के दौरान किराना हिल्स का नाम लगातार सुर्खियों में रहा। पाकिस्तान के सरगोधा से लगभग 10 किलोमीटर उत्तर में स्थित यह इलाका लंबे समय से पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम से जोड़े जाने के कारण संवेदनशील माना जाता रहा है। जब पाकिस्तानी मीडिया में किराना हिल्स से धुआं उठने की तस्वीरें सामने आईं, तो तरह-तरह के दावे शुरू हो गए। सवाल उठा कि क्या भारत ने पाकिस्तान की परमाणु सुविधाओं को निशाना बनाया था?
अब जनरल अनिल चौहान ने इस पूरे मामले पर विस्तार से स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने दो टूक कहा कि भारत ने जानबूझकर किराना हिल्स को निशाना नहीं बनाया था। जनरल चौहान के मुताबिक, सरगोधा क्षेत्र में पाकिस्तान के सैन्य रडार ठिकानों को खोजने और नष्ट करने के लिए बड़ी संख्या में लोइटरिंग म्यूनिशन भेजे गए थे। इनमें इजराइली डिजाइन का हारोप भी शामिल था। ऐसे हथियार हवा में एक निश्चित अवधि तक घूमते हुए लक्ष्य तलाश सकते हैं और उपयुक्त लक्ष्य मिलने पर उस पर प्रहार करते हैं।
बताया गया कि एक हारोप लोइटरिंग म्यूनिशन अपने निर्धारित लक्ष्य यानि सरगोधा क्षेत्र में मौजूद पाकिस्तानी सैन्य रडार को खोज नहीं पाया। वह लगभग दो घंटे तक अपने ऑपरेशनल क्षेत्र में लक्ष्य तलाशता रहा और इस दौरान उसका ईंधन लगातार कम होता गया। अंततः जब उसकी उड़ान क्षमता समाप्त होने लगी, तो वह नीचे आया और संभवतः किराना हिल्स क्षेत्र की किसी पहाड़ी से टकरा गया। यही वह घटना थी, जिसने पाकिस्तानी मीडिया में नई अटकलों को जन्म दिया। धुआं दिखाई दिया और देखते ही देखते किराना हिल्स को लेकर दावे तेज हो गए। लेकिन भारतीय पक्ष ने स्पष्ट किया कि परमाणु सुविधाओं को निशाना बनाने की कोई योजना नहीं थी। यह सरगोधा क्षेत्र में रडार खोजने के अभियान के दौरान हुई एक अनपेक्षित घटना थी।
फिर भी इस पूरे घटनाक्रम का बड़ा संदेश पाकिस्तान के लिए किसी चेतावनी से कम नहीं है। भारतीय अभियान का मूल उद्देश्य आतंकवादी ढांचे को ध्वस्त करना और पाकिस्तान की उन सैन्य क्षमताओं को नुकसान पहुंचाना था, जिनका इस्तेमाल भारत के खिलाफ आक्रामक गतिविधियों के लिए किया जा सकता था। देखा जाये तो किराना हिल्स का प्रसंग भले ही जानबूझकर किया गया हमला नहीं था, लेकिन सरगोधा के आसपास भारतीय लोइटरिंग म्यूनिशन की सक्रियता ने यह जरूर दिखा दिया कि पाकिस्तान का रणनीतिक क्षेत्र भारतीय सैन्य योजनाकारों की निगाह से बाहर नहीं है।
हम आपको याद दिला दें कि ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद हुई। भारत ने मई 2025 में पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में मौजूद आतंकवादी ढांचे के खिलाफ कार्रवाई करते हुए नौ प्रमुख आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था। इन जवाबी हमलों में 100 से अधिक आतंकवादियों के मारे जाने की बात सामने आई थी। इसके बाद संघर्ष के दौरान पाकिस्तान के महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों, जिनमें सरगोधा एयरबेस भी शामिल था, उस पर भारतीय कार्रवाई ने टकराव को और गंभीर बना दिया था।
भारतीय सेना और वायुसेना के इस अभियान का सबसे बड़ा पहलू सिर्फ हथियारों का इस्तेमाल नहीं था, बल्कि सटीक योजना, लक्ष्य चयन, तकनीकी क्षमता और परिस्थितियों के अनुसार रणनीति बदलने की क्षमता थी। स्कार्दू को लक्ष्य के रूप में मंजूरी मिलना, खराब मौसम के कारण विकल्प बदलना, सरगोधा क्षेत्र में रडार-हंटिंग लोइटरिंग म्यूनिशन का इस्तेमाल और अलग-अलग मोर्चों पर दबाव बनाए रखना, ये सभी संकेत देते हैं कि अभियान किसी एक कार्रवाई तक सीमित नहीं था।
जनरल अनिल चौहान ने यह भी रेखांकित किया है कि ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी है। इसका अर्थ केवल सैन्य कार्रवाई की निरंतरता नहीं, बल्कि उस व्यापक रणनीतिक संदेश से भी है जो भारत ने पाकिस्तान को दिया है, यानि आतंकवाद और उसके समर्थन को अब पुरानी सोच के साथ नहीं देखा जाएगा।
देखा जाये तो पाकिस्तान हर बार परमाणु हथियारों और अंतरराष्ट्रीय दबाव की आड़ में आतंकवाद को रणनीतिक हथियार बनाकर चलता था लेकिन भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के जरिए यह स्पष्ट कर दिया कि जवाब देने की उसकी क्षमता केवल सीमावर्ती गोलीबारी तक सीमित नहीं है। जरूरत पड़ने पर लक्ष्य सरगोधा हो सकता है, स्कार्दू हो सकता है या कोई दूसरा सैन्य और आतंकी ढांचा भी हो सकता है, लेकिन फैसला भारत अपने राष्ट्रीय हित और सुरक्षा आवश्यकताओं के आधार पर करेगा।
किराना हिल्स पर जानबूझकर हमला नहीं हुआ, यह भारत ने साफ कर दिया है। लेकिन सरगोधा से स्कार्दू तक फैली ऑपरेशन सिंदूर की कहानी पाकिस्तान के लिए एक बड़ा रणनीतिक संदेश जरूर है। संदेश यह है कि भारत शांति चाहता है, लेकिन अगर आतंकवाद के जरिए उसे चुनौती दी जाएगी, तो जवाब ऐसा होगा जिसकी गूंज सीमा के उस पार बहुत दूर तक सुनाई देगी।