विरोधियों को दिक्कत कृषि कानूनों से नहीं, इस बात से है कि मोदी ने ये कैसे कर दियाः नरेंद्र मोदी

By दिनेश शुक्ल | Dec 18, 2020

रायसेन। नए कृषि कानूनों की बहुत चर्चा हो रही है, लेकिन ये कानून रातोंरात नहीं आए। पिछले 20-22 सालों से हर सरकार इन पर विचार करती रही, विमर्श चलता रहा। देश के कृषि विशेषज्ञ, वैज्ञानिक और उन्नत किसान लगातार इनकी मांग करते आए हैं। अगर सभी दलों के घोषणा पत्र देखे जाएं, नेताओं के बयान और चिट्ठियां देखी जाएं, तो इनमें वही बात की गई है। कृषि सुधार कानून उनसे अलग नहीं है। इन्हें तकलीफ कृषि कानूनों से नहीं है, इन्हें दिक्कत इस बात से है कि जो हम अपने घोषणापत्र में कहते थे और कर नहीं पाए, उसे मोदी ने कैसे कर दिया? मोदी इसकी क्रेडिट कैसे ले सकता है? लेकिन मैं कहता हूं, मुझे क्रेडिट नहीं चाहिए, मुझे किसानों के जीवन में आसानी और समृद्धि चाहिए। मैं आपके घोषणापत्रों को ही इन कानूनों की क्रेडिट दे देता हूं, लेकिन आप किसानों को बरगलाना छोड़ दीजिए। यह बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को रायसेन में आयोजित किसान सम्मेलन को वर्चुअल रूप से संबोधित करते हुए कही। 

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वोटबैंक की राजनीति करने वालों को देश जान गया है

मोदी ने कहा कि आज जो लोग किसानों के नाम पर झूठे आंसू बहा रहे हैं, उनके लिए किसान कभी भी देश की शान नहीं रहा, ये राजनीति के लिए उसका इस्तेमाल करते रहे हैं। ये लोग किसानों के प्रति कितने निर्दयी रहे हैं, मैं इसका खुलासा करना चाहता हूं। इन लोगों ने 8 सालों तक स्वामीनाथन कमीशन की रिपोर्ट को दबाकर बैठे रहे और किसान इंतजार करता रहा। हमारी सरकार किसान को अन्नदाता मानती है और हमने उन सिफारिशों को लागू करते हुए किसान को उसकी लागत का डेढ़ गुना समर्थन मूल्य दिया। ये किस तरह से धोखाधड़ी करते हैं, उसका उदाहरण किसानों की कर्जमाफी है। इन्होंने मध्य प्रदेश में चुनाव के समय 10 दिनों में कर्जमाफी का वादा किया और जब सरकार बन गई, तो बहाने बनाने लगे। राजस्थान के किसान भी कर्जमाफी का इंतजार कर रहे हैं। ये हर चुनाव के समय कर्जमाफी की बात करते हैं, लेकिन कभी उस तरह से कर्जमाफी नहीं करते, जैसा कहते हैं। इनकी कर्जमाफी का लाभ छोटे किसानों को नहीं, इनके करीबियों को मिलता था। इन वोटबैंक की राजनीति करने वालों को देश जान गया है। जब ये लोग किसान हित की बात करते हैं, तो आश्चर्य होता है कि कोई इस हद तक छल-कपट कैसे कर सकता है?

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हमारी नीयत पवित्र है

प्रधानमंत्री ने कहा कि किसानों को लेकर हमारी नीयत गंगाजल जैसी पवित्र है। हम ये मानते हैं कि भारत के किसानों को विश्व स्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराने में अब देर नहीं की जा सकती। भारत का किसान इन सुविधाओं के अभाव में रहे, यह हमें स्वीकार्य नहीं है। किसानों को धोखा देने वाले लोग 10 सालों में एक बार 50 हजार करोड़ की कर्जमाफी करते हैं, हम प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि में हर साल 75000 हजार करोड़ रुपये सीधे किसानों के खाते में पहुंचाते हैं। 10 साल में यह राशि 7.5 लाख करोड़ होती है। उन्होंने कहा कि 8 साल पहले किसान यूरिया के लिए रात-रात भर लाइन में लगे रहते थे फिर भी उसकी फसल बर्बाद हो जाती थी। लेकिन इनका दिल नहीं पसीजा। अब ऐसा नहीं होता। हमने नए प्रावधान किए, भ्रष्टाचार पर नकेल कसी, यूरिया की नीम कोटिंग शुरू की। आने वाले समय में गोरखपुर, बरौनी, सिंदरी, तालकेर और रामागुंडम में आधुनिक तकनीक वाले यूरिया प्लांट शुरू हो जाएंगे। हमने तय किया है देश को यूरिया उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाएंगे, इन्हें ऐसा करने से किसने रोका था? इनके पास नीयत, नीति और निष्ठा नहीं थी। इन्हें किसानों की चिंता होती, तो 100 से अधिक सिंचाई प्रोजेक्ट लटके नहीं रहते। हमारी सरकार इन परियोजनाओं को मिशन मोड पर पूरा कर रही है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि हमने खेती की लागत को कम करने के लिए प्रयास किए। किसानों को कम कीमत पर सोलर पंप दिये जा रहे हैं और हम अन्नदाता को ऊर्जादाता बनाने के लिए भी काम कर रहे हैं।

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लगातार झूठ बोल रहे हैं, भ्रम फैला रहे हैं

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि विपक्षी दलों के लोग लगातार झूठ बोल रहे हैं। भ्रम फैला रहे हैं कि एमएसपी बंद हो जाएगी, मंडियां बंद हो जाएंगी। इससे बड़ा कोई झूठ और षडयंत्र नहीं हो सकता। तीनों कानून लागू हुए 6-7 महीने हो गए हैं और उसी एमएसपी पर किसानों की फसलें उन्हीं मंडियों में खरीदी जा रही हैं। श्री मोदी ने कहा कि अगर हमें एमएसपी बंद करना होता, तो हम स्वामीनाथन कमीशन की अनुशंसाओं को क्यों लागू करते? उन्होंने कहा कि मैं विश्वास दिलाता हूं कि एमएसपी बंद नहीं होगी। हमारी सरकार एमएसपी को लेकर कितनी गंभीर है, उसका अंदाज इन तथ्यों से लगा सकते हैं कि पिछली सरकार ने गेहूं का समर्थन मूल्य 1400 रुपये क्विंटल तय किया था, हम 1975 रुपये दे रहे हैं। उन्होंने धान का एमएसपी 1310 रुपये तय किया था, हम 1870 दे रहे हैं। वे ज्वार का समर्थन मूल्य 1520 रुपये देते थे, हम 2640 दे रहे हैं। उन्होंने चने का मूल्य 3100 रुपये दिया, हम 5100 दे रहे हैं। वो तूअर 4300 रुपये प्रति क्विंटल खरीदते थे, हम 6000 रुपये पर खरीद रहे हैं। वो मूंग 4500 रुपये पर खरीदते थे, हम 7200 रुपये पर खरीद रहे हैं। श्री मोदी ने कहा कि ये इस बात का सबूत है कि हमारी सरकार एमएसपी को लेकर कितनी गंभीर है।

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इन्होंने जो पाप किए, उसका प्रायश्चित है कृषि सुधार कानून

मोदी ने कहा कि हमने कृषि सुधार कानूनों के जरिये किसानों को आजादी दी है। हमने सिर्फ ये किया है कि किसान को जहां फायदा हो, वह अपनी उपज बेच सकता है। मंडी भी चालू है, वो चाहे तो अपनी उपज वहां भी बेच सकता है, बाहर भी बेच सकता है। लेकिन इन्होंने किसानों को बांधकर रखा और इनके इसी पाप का प्रायश्चित है कृषि सुधार कानून। मोदी ने कहा कि कानून लागू होने के बाद से एक भी मंडी बंद नहीं हुई, हम मंडियों को आधुनिक बना रहे हैं। कानून का विरोध कर रहे लोग तीसरा झूठ फार्मिंग एग्रीमेंट को लेकर बोल रहे हैं, जबकि ये व्यवस्था कोई नई बात नहीं है, बरसों से चल रही है। उन्होंने कहा कि हाल ही में पंजाब सरकार ने प्रदेश के किसानों द्वारा किए गए 800 करोड़ के एक एग्रीमेंट का जश्न मनाया था। हमने पुराने तरीकों को सुधारा है, किसानों को सुरक्षा दी है। मोदी ने किसानों से आग्रह किया कि वे भ्रम फैलाने वाली ताकतों से सतर्क रहें, इन्होंने हमेशा किसानों को धोखा दिया है, इस्तेमाल किया है और आज भी कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर किसी को भी इन कानूनों को लेकर कोई भी आशंका है, तो हम सिर झुकाकर, पूरी विनम्रता के साथ बात करने को तैयार हैं, हमारे लिए किसानों का हित सर्वोपरि है।

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