By अंकित सिंह | Mar 06, 2026
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को भारतीय विदेश नीति को "एक भ्रष्ट व्यक्ति का शोषण" बताया। यह बयान तब आया जब अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले समुद्री मार्गों में व्यवधान के बीच भारत को रूसी तेल खरीदने की छूट दे दी। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने गुरुवार (स्थानीय समय) को पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के दौरान ईरान का मुकाबला करने के लिए 30 दिन के इस उपाय की घोषणा की, जिससे कच्चे तेल की आपूर्ति करने वाले खाड़ी देशों पर गंभीर असर पड़ा है।
संप्रभुता के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर कटाक्ष करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि नई दिल्ली की विदेश नीति देश के इतिहास और मूल्यों पर आधारित होनी चाहिए। गांधी ने लिखा कि भारत की विदेश नीति हमारे लोगों की सामूहिक इच्छा से उत्पन्न होती है। यह हमारे इतिहास, हमारे भूगोल और सत्य एवं अहिंसा पर आधारित हमारे आध्यात्मिक मूल्यों पर आधारित होनी चाहिए। आज हम जो देख रहे हैं वह नीति नहीं है। यह एक भ्रष्ट व्यक्ति के शोषण का परिणाम है।
आज सुबह कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने भी सवाल उठाया कि क्या भारत को अपने ऊर्जा स्रोतों पर निर्णय लेने के लिए अमेरिका से अनुमति की आवश्यकता है? अमेरिका के नव-साम्राज्यवादी अहंकार की आलोचना करते हुए कांग्रेस नेता ने लिखा कि 30 दिन की छूट जारी करना' - यह खोखली भाषा नव-साम्राज्यवादी अहंकार से भरी है। क्या हम कोई ऐसा देश हैं जिसे अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए अमेरिका की अनुमति की आवश्यकता है?"
अमेरिका के बयान पर नई दिल्ली की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए तिवारी ने आगे कहा कि एक अति-वाक्पटु सरकार की यह चुप्पी चौंकाने वाली है। क्या इसे संप्रभुता का अर्थ नहीं पता? कांग्रेस की यह टिप्पणी अमेरिकी वित्त मंत्री के उस बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने घोषणा की थी कि विभाग ने भारत को रूसी तेल खरीदने की अनुमति देते हुए 30 दिन की छूट जारी की है, जिससे वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी। वाशिंगटन ने कहा कि वह इस अल्पकालिक छूट के बाद नई दिल्ली से अमेरिकी तेल की खरीद में "वृद्धि" की उम्मीद करता है।