बंगाल और राजस्थान में महिलाओं पर बढ़ते अत्याचारों को लेकर खुद कटघरे में आ गये हैं विपक्षी दल

By योगेंद्र योगी | Aug 08, 2023

मणिपुर हिंसा पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बयान की मांग को लेकर संसद ठप करने वाले विपक्षी दलों को महिला अत्याचारों और हिंसा को लेकर राजस्थान और बंगाल में भेदभाव को लेकर कटघरे में आ गए हैं। महिला अत्याचारों को लेकर राजस्थान फिर से सुर्खियों में आ गया है। अलवर जिले में दो सामूहिक बलात्कार की घटनाओं ने राज्य की अशोक गहलोत सरकार की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। राजस्थान की कांग्रेस सरकार पहले से ही भ्रष्टाचार के आरोपों से बुरी तरह से घिरी हुई है। इस राज्य में महिला अत्याचारों की नई वारदातों ने भाजपा को ज्यादा हमलावर बना दिया है। पिछले दिनों प्रधानमंत्री मोदी ने सीकर में जनसभा के दौरान गहलोत सरकार पर लाल डायरी और महिला अत्याचारों पर जमकर कटाक्ष किए थे। आश्चर्य की बात यह है कि राजस्थान के एक मंत्री राजेन्द्र सिंह गुढ़ा ने ही भ्रष्टाचार और महिला अत्याचारों को लेकर कटघरे में खड़ा किया। विधानसभा की कार्रवाई के दौरान मंत्री गुढ़ा ने एक लाल डायरी हाथ में लेकर गहलोत सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए।

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गौरतलब है कि राजस्थान में देशभर में दुष्कर्म के मामलों में पहले स्थान पर है। यहां 10 साल से कम उम्र की बच्चियों के साथ दुष्कर्म के केस 2.79 फीसदी बढ़े हैं। वहीं, छोटी बच्चियों के साथ गैंगरेप की वारदात में भी इस साल 13.64 फीसदी की वृद्धि हुई है। 10 साल की बच्चियों के साथ दुष्कर्म के मामलों में 2.79 फीसदी का इजाफा हुआ है। ये खुलासा हाल ही में राजस्थान पुलिस की रिपोर्ट में हुआ है। सबसे चिंताजनक और डराने वाली बात यह है कि बच्चियों के साथ दुष्कर्म और गैंगरेप के मामले साल दर साल बढ़ते जा रहे हैं। यह खुलासा राजस्थान पुलिस की जून-2023 तक की मासिक रिपोर्ट में हुआ है।   राजस्थान की तरह विपक्षी दल पश्चिमी बंगाल में महिला अत्याचारों पर मौन साधे हुए हैं। भाजपा सांसद लॉकेट चटर्जी यह कहते हुए रो पड़ीं कि क्या इन राज्यों में महिलाओं के खिलाफ अत्याचारों पर तभी ध्यान दिया जाएगा जब ऐसी घटनाओं को रिकॉर्ड करने वाले वीडियो वायरल होंगे। लॉकेट चटर्जी ने दावा किया कि 3,000 से अधिक महिलाएं राहत शिविरों में हैं। पश्चिमी बंगाल में चुनाव के दौरान और उसके बाद हिंसा में 57 से अधिक लोग मारे गए। पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में लोगों के एक समूह ने दो आदिवासी महिलाओं को निर्वस्त्र किया और उनके साथ मारपीट की। इस मामले में मालदा पुलिस ने तीन महिला सहित पांच लोगों को गिरफ्तार किया। बीजेपी ने आरोप लगाया कि बंगाल में कुछ दिन पहले दो आदिवासी महिलाओं को निर्वस्त्र कर यातना देने के दौरान पुलिस मूकदर्शक बनी रही। भाजपा का आरोप है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ऐसे मामलों में कुछ नहीं करने का फैसला किया। पश्चिम बंगाल में हावड़ा जिले के पंचला थाने के तहत दक्षिण पंचला में पीड़ित महिला का आरोप है कि पंचायत चुनाव के दिन टीएमसी के गुंडों ने उसे निर्वस्त्र कर गांव में घुमाया। घटना के संबंध में पीड़िता की ओर से पंचला थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है।

पश्चिम बंगाल और राजस्थान की तरह बिहार में हुई हिंसा की वारदात को लेकर विपक्षी दलों ने विरोध में प्रतिक्रिया तक देना जरूरी नहीं समझा। बिहार के कटिहार में अनियमित बिजली व्यवस्था को लेकर तय कार्यक्रम के तहत बड़ी संख्या में ग्रामीण और स्थानीय जन प्रतिनिधि बारसोई प्रखंड कार्यालय परिसर में प्रदर्शन कर रहे थे। पुलिस के द्वारा की गई फायरिंग में एक व्यक्ति की मौत हो गई और दो लोग घायल हो गए। यही घटना यदि किसी भाजपा शासित राज्य में हुई होती तो समूचा विपक्ष आसमान सिर पर उठा लेता। बिजली जैसी बुनियादी मांग को लेकर सड़कों पर उतरने पर मजबूर हुए लोगों पर पुलिस फायरिंग की वारदात पर विपक्षी दलों ने नीतिश सरकार के खिलाफ एक शब्द भी नहीं बोला। विपक्षी दलों वाले राज्यों में भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था की बिगड़ी स्थिति और महिला अत्याचारों के मामलों में मौन साधे रहने से ही भाजपा को विपक्षी एकता पर प्रहार करने का मौका मिला है।

यही वजह है कि प्रधानमंत्री मोदी विपक्षी एकता के गठबंधन के प्रयासों को भ्रष्टाचार और अपराधों पर पर्दा डालने का गठबंधन बनाने का आरोप लगा चुके हैं। विपक्षी दलों के भ्रष्टाचार के मामलों में ईडी और सीबीआई की कार्रवाई को विपक्षी दल केंद्र की भाजपा सरकार के इशारे पर की गयी कार्रवाई होने के आरोप लगा चुके हैं। लेकिन कैंसर की तरह देश को खोखला कर रही इस समस्या के ठोस समाधान की दिशा में पहल नहीं की गई। विपक्षी दलों ने एक बार भी इसका खुलासा नहीं किया कि भ्रष्टाचार के मामलों में उसकी नीति क्या होगी। इसके विपरीत विपक्षी दलों का पूरा जोर केंद्र की भाजपा सरकार के खिलाफ गठबंधन तैयार करने का रहा है। जिसका एकमात्र उद्देश्य लोकसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ संयुक्त उम्मीदवार खड़ा करना है, ताकि वोटों का ध्रुवीकरण रोका जा सके। देश के लिए घातक साबित हुए मुद्दों पर विपक्षी दलों ने कोई राय जाहिर नहीं की। सवाल यही है कि आखिर विपक्षी दल कब तक दोहरी नीति अपनाते रहेंगे। विपक्षी दलों पर ऐसे आरोप तब तक लगते रहेंगे जब तक भ्रष्टाचार और आपराधिक मामलों में समान नजरिया नहीं अपनाएंगे। ऐसे संवदेनशील मुद्दों पर विपक्षी दलों के गठबंधन को पारदर्शिता और समानदर्शी नीति का पालन करना होगा। सिर्फ चुनाव के लड़ने के लिए गठबंधन करने मात्र से मतदाताओं का भरोसा जीतना मुश्किल है। ऐसा नहीं करने पर भाजपा को लगातार हमला करने का मौका मिलता रहेगा।

-योगेन्द्र योगी

लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं

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