पेगासस पर हवाई हल्ला मचाने वाले विपक्ष को मुद्दे उठाने से पहले तैयारी करनी चाहिए

By डॉ. वेदप्रताप वैदिक | Aug 29, 2022

इस्राइल से 500 करोड़ रु. में खरीदे गए पेगासस नामक जासूसी यंत्र की जांच में कुछ भी नहीं मिला। भारत सरकार पर यह आरोप था कि इस यंत्र के जरिए वह भारत के लगभग 300 नेताओं, पूंजीपतियों, पत्रकारों और महत्वपूर्ण नागरिकों पर जासूसी करती है। यह खबर जैसे ही ‘न्यूयार्क टाइम्स’ में छपी भारत में तूफान-सा आ गया। संसद ठप्प हो गई, टीवी चैनल और अखबारों में धमाचौकड़ी मचने लगी और सरकार हतप्रभ हो गई। सरकार की घिग्घी ऐसी बंधी कि इस खबर को उससे न निगलते बन रहा था, न उगलते। न तो वह संसद के सामने बोली और न ही अदालत के सामने। उसने बस, एक ही बात बार-बार दोहराई कि यह भारत की सुरक्षा का मामला है। गोपनीय है। यदि अदालत कहे तो वह जांच बिठा सकती है कि क्या आतंकवादियों, अपराधियों और तस्करों के अलावा भी किंही नागरिकों पर यह निगरानी रखी जाती है?

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आश्चर्य इस बात पर है कि जो रवैया सरकार का रहा है, वही रवैया उन ज्यादातर लोगों का भी रहा है, जिन 300 लोगों के मोबाइल फोनों की जांच होनी थी। 300 में से सिर्फ 29 लोगों ने जांच के लिए फोन दिए। बाकी लोग चुप्पी मार गए याने जो हल्ला मचा था, वह हवाई था। उन 29 फोनों की तकनीकी जांच से विशेषज्ञों को मालूम पड़ा कि उनमें से एक पर भी पेगासस के जासूसी यंत्र की निगरानी नहीं थी। सिर्फ पांच फोनों पर मॉलवेयर पाया गया। याने पेगासस को लेकर खाली-पीली हल्ला मचाया जा रहा है। यदि यह सच है तो सरकार ने इस कमेटी के साथ खुलकर सहयोग क्यों नहीं किया?

इसका मतलब दाल में कुछ काला है लेकिन जिन लोगों को अपनी निगरानी का शक है, उनकी दाल ही काली मालूम पड़ रही है। पहले तो 300 में से सिर्फ 29 लोग ही जांच के लिए आगे आए और उन 29 ने भी कह दिया कि उनके नाम प्रकट नहीं किए जाएं। इसका अर्थ क्या हुआ? क्या यह नहीं कि सरकार से भी ज्यादा हमारे नेता, पूंजीपति, पत्रकार और अन्य लोग डरे हुए हैं। सरकार अपने अवैध कारनामों को छिपाना चाहती है तो ये देश के महत्वपूर्ण लोग अपने काले कारनामों पर पर्दा डाले रखना चाहते हैं। यदि आप कोई अवैध या अनैतिक काम नहीं कर रहे हैं तो आपको उसे छिपाने की क्या जरूरत है? फिर भी नागरिकों की निजता और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए यह जरूरी है कि सरकार द्वारा की जा रही जासूसी निरंकुश न हो। राज्य के उत्तम स्वास्थ्य के लिए जासूसी कड़वी दवाई की तरह है लेकिन इसे रोजमर्रा का भोजन बना लेना उचित नहीं है।

-डॉ. वेदप्रताप वैदिक

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