क्या है ओटीटी और क्यों यह हावी होता जा रहा है मेन स्ट्रीम प्लेटफॉर्म्स पर!

By मिथिलेश कुमार सिंह | May 09, 2020

यूं तो कोरोना वायरस और लॉकडाउन के पहले से ही ओटीटी यानी over-the-top सर्विसेज अपनी बढ़त बढ़ाता जा रहा था, लेकिन लॉक डाउन में तो यह मनोरंजन के लिहाज से अपरिहार्य ही हो गया है। अब एक बड़ा समूह इस पर आश्रित है। पिछले दिनों एक न्यूज़ आई, जिसमें कहा गया कि लॉक डाउन के दौरान बॉलीवुड की फिल्में भी ओटीटी पर रिलीज होने वाली हैं। 

जरा सोचिए, फिलहाल देश भर में थिएटर जहां बंद हैं, अब उसके ऑप्शन के रूप में ओटीटी प्लेटफॉर्म को इस्तेमाल करने की बातें उठने लगी हैं। वस्तुतः इससे पूरी तरह से कोई इंकार भी नहीं कर सकता।

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फिल्म इंडस्ट्री के बड़े स्टार रणवीर सिंह और दीपिका पादुकोण की स्पोर्ट्स ड्रामा 83 को लेकर भी ऐसी न्यूज़ आई थी और फिल्म के डायरेक्टर कबीर खान ने बताया था कि इसकी रिलीज के लिए तो ओटीटी प्लेटफॉर्म्स मेकर्स को बड़ी रकम ऑफर कर रहे थे। हालाँकि, कबीर खान ने इसे ओटीटी पर रिलीज करने से मना कर दिया, पर यह प्रश्न तो उठता ही है कि ओटीटी वास्तव में इतनी तेजी से क्यों आगे बढ़ रहा है?

साथ ही आने वाले दिनों में इसकी तस्वीर कैसी होने वाली है?

मोमैजिक द्वारा किये गए एक सर्वे की बात करें, तो तकरीबन 70 फ़ीसदी लोग मोबाइल पर वीडियो कंटेंट देखते हैं। यह 2019 अगस्त का यह सर्वे है, जिसमें देश में 55% लोग टीवी शो, स्पोर्ट्स, फिल्में अलग-अलग ओटीटी प्लेटफॉर्म जिसमें नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम, हॉटस्टार इत्यादि शामिल हैं, कंज्यूम कर रहे थे। इसी प्रकार से 41% लोग कंटेंट देखने के लिए डीटीएच प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे थे, जिसमें डिश टीवी, टाटा स्काई इत्यादि शामिल हैं। 

जाहिर तौर पर ओटीटी प्लेटफॉर्म जिस तेजी से बढ़ रहे हैं, उससे तमाम डीटीएच ऑपरेटर्स को बड़ी चुनौती पेश आ रही है। अब लॉकडाउन ने निश्चित रूप से इस आंकड़े को बड़े स्तर पर मजबूत किया होगा।

इसका कारण बड़ा साफ़ है। इंटरनेट जैसे-जैसे अपनी स्पीड बढ़ाता जा रहा है, उसकी पहुंच बढ़ती जा रही है, वैसे-वैसे अपने मोबाइल के जरिए कहीं भी वीडियो, कंटेंट देखने की फैसिलिटी ने इसको जबरदस्त मजबूती प्रदान की है। उपरोक्त सर्वे में ही अनुमान लगाया गया है कि 2023 तक 3.6 लाख करोड़ रुपए का केवल भारत में ही ओटीटी का मार्केट होगा।

करण जोहर बेशक आज ओटीटी पर फिल्मों की रिलीज करने की बात से हिचक रहे हों, लेकिन आने वाले समय में यह पूरी एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री ही प्राइवेट हो जाने वाली है, और हर किसी के हाथ में यह आजादी आने वाली है कि वह क्या देखे, क्या नहीं देखे। प्रचार के साथ देखे या प्रीमियम कंटेंट परचेज करके बिना प्रचार के देखे।

प्राइजिंग के लिहाज से भी बात करें तो टेलीविजन पर मंथली पैक ₹150 से कम कहीं भी नहीं है, लेकिन ओटीटी जैसे तमाम प्लेटफार्म ₹999 या उससे कम पर साल भर के लिए उपलब्ध हैं। इसके हावी होने के पीछे एक बड़ा कारण यह भी सामने आ रहा है कि इस पर कंटेंट की वैरायटी है। ज़रा सोचिये, अगर अमेरिका में कोई वेब सीरीज बन रही है और वहां लोकप्रिय हो रही है तो नेटफ्लिक्स जैसे प्लेटफॉर्म यह सुनिश्चित करते हैं कि विश्व के दूसरे हिस्से में भी वह कंटेंट प्रॉपर अनुवाद के साथ उपलब्ध हो। 

खुद भारत में बनी सेक्रेड गेम्स जैसी बड़ी सीरीज 126 से अधिक भाषाओं में डब की गयी थी, जिसे वर्ल्डवाइड बड़ी सफलता मिली।

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आप यह जानकर आश्चर्य न कीजिये कि वर्तमान में एप्पल, डिज्नी, यू ट्यूब, प्ले स्टेशन, गूगल प्ले मूवी एंड टीवी, स्लिंग टीवी इत्यादि बड़े प्लेयर इस मैदान में उतर चुके हैं। नेटफ्लिक्स, अमेज़न प्राइम, हॉटस्टार, जी5, एमएक्स प्लेयर इत्यादि के नामों से तो आप परिचित पहले ही होंगे। 

एडवरटाइजर के लिहाज से भी बड़ी कम्पनियां अपना रूख ओटीटी पर कर रही हैं। आखिर, उनके लिए फोकस ऑडियंस जो मिल जाती है।

देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में ओटीटी से मेन स्ट्रीम प्लेटफॉर्म्स किस प्रकार अपने ऑडियंस को सुरक्षित रख पाते हैं। या फिर वह खुद भी अपने कंटेंट के लिए इन प्लेटफॉर्म्स का प्रयोग करने को वरीयता देंगे, जानना दिलचस्प होगा।

मिथिलेश कुमार सिंह

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