By अभिनय आकाश | Jul 11, 2026
एक तरफ पाकिस्तान के साथ तनाव चरम पर है तो दूसरी तरफ तालिबान भारत के साथ अपने रिश्तों को लगातार मजबूत करने में जुटा है और इसी कड़ी में तालिबान के कृषि सिंचाई और पशुपालन मंत्री अताउल्लाह उमारी का भारत दौरा कई मायनों में बेहद अहम माना जा रहा है और यह दौरा बदलते क्षेत्रीय समीकरणों और नई कूटनीतिक दिशा का भी बड़ा संकेत है और भारत पहुंचते ही अताउल्ला उमारी ने जो बात कही उसने इस दौरे की अहमियत और बढ़ा दी। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि भारत और अफगानिस्तान का रिश्ता कोई आज का रिश्ता नहीं बल्कि सदियों पुराना है। उन्होंने कहा कि यहां आने के बाद मुझे ऐसा लगा जैसे मैं अपने ही लोगों के बीच में हूं। मुझे कभी भी नहीं लगा कि मैं किसी अजनबी देश में हूं। इतना ही नहीं उन्होंने दोनों देशों के लोगों के बीच गहरे जुड़ाव का जिक्र करते हुए यह तक कह दिया कि हमारा डीएनए एक है। इस बयान को तालिबान की ओर से भारत के प्रति सकारात्मक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
दोनों पक्षों के बीच संपर्क लगातार बढ़ रहा है और भारत ने भले ही अब तक तालिबान सरकार को औपचारिक मान्यता नहीं दी है, लेकिन व्यवहारिक स्तर पर बातचीत और सहयोग का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है। भारत और अफगानिस्तान के रिश्ते भी नए-नए हैं। पिछले दो दशकों में भारत ने अफगानिस्तान में अरबों रुपए की विकास परियोजनाएं पूरी की हैं। संसद भवन का निर्माण, सलमाबान, सड़कें, बिजली परियोजनाएं, स्कूल, अस्पताल और मानवीय सहायता। भारत लगातार अफगानिस्तान के लोगों के साथ खड़ा रहा। 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद भी भारत ने मानवीय सहायता, दवाइयां, गेहूं और अन्य जरूरी सामान की आपूर्ति जारी रखी। भारत की कोशिश रही है कि अफगानिस्तान की जनता तक मदद पहुंचती रहे और क्षेत्र में स्थिरता बनी रहे और यही वजह है कि आज अफगानिस्तान अगर सबसे ज्यादा भरोसा किसी देश पर करता है तो वो भारत है। हाल के महीनों में पाकिस्तान और तालिबान के रिश्ते लगातार बिगड़े हैं। सीमा पर कई बार संघर्ष हुआ है।