हमारी संसद लोकतंत्र का मंदिर, प्रतिस्पर्धा को प्रतिद्वंद्विता नहीं समझा जाना चाहिए: राष्ट्रपति कोविंद

By अंकित सिंह | Nov 26, 2021

संविधान दिवस के अवसर पर संसद भवन के सेंट्रल हॉल में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने संविधान सभा की चर्चाओं का डिजिटल संस्करण जारी किया और संवैधानिक लोकतंत्र पर आधारित ऑनलाइन प्रश्नोत्तरी का भी शुभारंभ किया। अपने संबोधन में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। मुझे विश्वास है कि आप सब भी इस अवसर पर हमारे महान लोकतंत्र के प्रति गौरव का अनुभव कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसी सेंट्रल हॉल में 72 वर्ष पहले हमारे संविधान निर्माताओं ने स्वाधीन भारत के उज्ज्वल भविष्य के दस्तावेज को यानि हमारे संविधान को अंगीकार किया था तथा भारत की जनता के लिए आत्मार्पित किया था। राष्ट्रपति ने कहा कि लगभग सात दशक की अल्प अवधि में ही, भारत के लोगों ने लोकतान्त्रिक विकास की एक ऐसी अद्भुत गाथा लिख दी है जिसने समूची दुनिया को विस्मित कर दिया है। मैं यह मानता हूं कि भारत की यह विकास यात्रा, हमारे संविधान के बल पर ही आगे बढ़ती रही है। हमारे संविधान में वे सभी उदात्त आदर्श समाहित हैं जिनके लिए विश्व के लोग भारत की ओर सम्मान और आशा भरी दृष्टि से देखते रहे हैं। "हम भारत के लोग", इन शब्दों से आरम्भ होने वाले हमारे संविधान से यह स्पष्ट हो जाता है कि भारत का संविधान लोगों की आकांक्षाओं की सामूहिक अभिव्यक्ति है। 

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