By अनन्या मिश्रा | Sep 15, 2026
आज के समय में महिलाएं घर के साथ-साथ ऑफिस की जिम्मेदारियों को बखूबी निभा रही हैं। हालांकि दोनों जगह की जिम्मेदारियों के चलते कई बार वह अपनी सेहत को नजरअंदाज कर देती हैं। आज की महिलाओं को ओवेरियन सिस्ट या ओवरी सिस्ट का सामना करना पड़ रहा है। यह एक सामान्य समस्या बनकर उभर रही है। ओवरी सिस्ट के होने के शुरूआती चरण में महिलाओं को किसी तरह के लक्षण नहीं दिखते हैं। रूटीन हेल्थ चेकअप के दौरान, अनियमित पीरियड्स या पेल्विक में दर्द की समस्या होने पर जांच करते समय इनका पता चलता है।
यह एक तरल पदार्थ से भरी थैली होती है, जोकि ओवरी के ऊपर या फिर अंदर बनती है। ओवरीज जरूरी प्रजनन अंग है, जो अंडे और हार्मोन जैसे एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन बनाते हैं। अधिकतर ओवेरियन सिस्ट सौम्य यानी की कैंसर रहित होती हैं। जोकि बिना किसी समस्या के खुद ठीक हो जाती हैं। वहीं कई बार यह सिस्ट बड़ी हो जाती हैं, जोकि असुविधाजनक या प्रजनन और हार्मोन से जुड़ी समस्याएं पैदा कर सकती हैं।
हेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो ओवेरियन सिस्ट बनने की वजह वजहें हो सकती हैं। जिनमें सबसे आम वजह 'फंक्शनल सिस्ट' हैं। जोकि मेंस्ट्रुअल साइकिल से जुड़े होते हैं। मासिक धर्म चक्र में ओव्यूलेशन वह प्रोसेस है, जब ओवरीज में विकसित होने वाले फॉलिकल्स से अंडे निकलते हैं। कई बार यह फॉलिकल्स ठीक तरह से नहीं खुलते हैं या फिर अंडा निकलने के बाद वह सिकुड़ जाते हैं। जिस कारण सिस्ट बन जाती है।
एंडोमेट्रियोसिस
गर्भावस्था से जुड़े सिस्ट
हार्मोनल असंतुलन
पेल्विस में संक्रमण
पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम
फैमिली हिस्ट्री या कुछ चिकित्सीय स्थितियां
कई मामलों में ओवेरियन सिस्ट होने के लक्षण दिखाई नहीं देते हैं। लेकिन जैसे-जैसे सिस्ट का आकार बढ़ता जाता है या जटिल होता जाता है, महिलाओं में फिर कई तरह के लक्षण महसूस हो सकते हैं।
संभोग के दौरान दर्द।
बार-बार पेशाब आना।
पेट में सूजन या भारीपन।
पीरियड्स का समय पर न आना।
कुछ मामलों में गर्भधारण में कठिनाई।
जी मिचलाना या उल्टी
पेल्विस या पेट के निचले हिस्से में दर्द होना।
हालांकि बहुत कम मामलों में महिलाओं का सिस्ट ज्यादा बढ़ सकता है या फिर ओवरी मुड़ सकती है। इसको ओवेरियन टॉर्शन कहा जाता है। जिसके कारण महिलाओं को अचानक से तेज दर्द हो सकता है।
अधिकतर ओवेरियन सिस्ट सौम्य होते हैं और समय के साथ ठीक हो जाती हैं। हालांकि इलाज का तरीका महिला की उम्र, सिस्ट के आकार, लक्षणों और अल्ट्रासाउंड के नतीजों पर निर्भर करता है। इसलिए लिए हमेशा सर्जरी पहला ऑप्शन नहीं होती है।
वहीं अगर किसी महिला को यह बताया जाता है कि उनको ओवेरियन सिस्ट है, तो उनको घबराना नहीं चाहिए। क्योंकि अक्सर सावधानीपूर्वक निगरानी और डॉक्टरी सलाह से साधारण सिस्ट ही ठीक हो जाते हैं।
जब सिस्ट का आकार ज्यादा बड़ा नहीं होता है।
लक्षण हल्के या बिल्कुल न के बराबर हों।
फटने या मुड़ने के कोई संकेत न हों
अल्ट्रासाउंड में साधारण और कैंसर-रहित दिखें।
कुछ मामलों में डॉक्टर महिलाओं को देखने और इंतजार करने का तरीका अपनाए जाने की सलाह दे सकते हैं। इसमें बार-बार यह देखने के लिए अल्ट्रासाउंड किया जाता है कि क्या सिस्ट सिकुड़ रहा है या फिर अपने आप ठीक हो रहा है।
कुछ खास मामलों में गर्भनिरोधक गोलियां या हार्मोनल थेरेपी दी जाती है।
दर्द कम करने वाली दवाएं।
लाइफस्टाइल और पीएमओएस मामलों में महिलाओं को वेट कंट्रोल करने की सलाह दी जाती है।
गंभीर लक्षण होना
कैंसर होने का शक होना।
अंडाशय फट जाए या मुड़ जाने की स्थिति में।
सिस्ट का आकार तेजी से बड़ा होना।
हेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो महिलाओं को पेट के निचले हिस्से में लगातार दर्द, पेट में बिना किसी वजह के आने वाली सूजन और मासिक धर्म में अनियमितता भूलकर भी नजरअंदाज करने की गलती नहीं करनी चाहिए। स्त्री रोग विशेषज्ञ से नियमित जांच करवाना, समय पर अल्ट्रासाउंड करवाना और ओवरी के सिस्ट का समय पर पता लगाने के साथ-साथ इसकी जटिलताओं से भी बचाव में मदद करता है।
ओवेरियन सिस्ट आम परेशानी होती हैं और कोई बड़ी समस्या नहीं होती है। लेकिन फिर भी डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है। वहीं सही जांच और इलाज से कई महिलाएं बिना सर्जरी के इससे निजात पा सकती हैं और अपने प्रजनन को भी स्वस्थ बनाए रख सकती हैं।