By Ankit Jaiswal | Oct 23, 2026
ओलंपिक चैंपियन नीरज चोपड़ा अब अपने गृह राज्य हरियाणा में बच्चों को खेलों से जोड़ने की एक खास पहल का हिस्सा बनने जा रहे हैं। भाला फेंक में देश का नाम रोशन करने वाले नीरज 24 अक्टूबर को सोनीपत के राई स्थित हरियाणा खेल विश्वविद्यालय में आयोजित यूबीएस एथलेटिक्स किड्स कप के नगर स्तरीय फाइनल में शामिल होंगे। इस कार्यक्रम में 350 से अधिक बच्चे हिस्सा लेंगे, जिन्होंने क्षेत्र में स्कूल स्तर पर आयोजित प्रतियोगिताओं में अच्छा प्रदर्शन करके यहां तक जगह बनाई है।
नीरज चोपड़ा ने कहा कि हरियाणा उनके लिए हमेशा खास रहेगा, क्योंकि खेलों में उनके सफर की शुरुआत इसी जगह से हुई थी। उनका मानना है कि हर बच्चे को, चाहे वह किसी भी जगह या परिवार से आता हो, खेलने और अपनी क्षमता पहचानने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि यूबीएस एथलेटिक्स किड्स कप के जरिए ज्यादा से ज्यादा बच्चों तक खेलों का मौका पहुंचाने और उन्हें बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित करने की कोशिश की जा रही है। नीरज के मुताबिक, जितने अधिक बच्चे खेलेंगे, देश को भविष्य के चैंपियन मिलने की संभावना भी उतनी ही बढ़ेगी।
बता दें कि नीरज चोपड़ा पिछले 2 वर्षों से इस पहल के प्रचारक के रूप में जुड़े हुए थे। इस साल वह आयोजन करने वाली कंपनी एसडी स्पोर्ट्स इंडिया के सह-मालिक भी बन गए हैं। इससे खेलों को बढ़ावा देने और बच्चों के लिए बेहतर अवसर तैयार करने की दिशा में उनकी भागीदारी और बढ़ गई है। राई में आयोजित होने वाले कार्यक्रम के दौरान नीरज प्रतिभागियों से मिलेंगे और उनकी भागीदारी तथा उपलब्धियों के लिए पुरस्कार भी देंगे।
यूबीएस एथलेटिक्स किड्स कप के सह-संस्थापक और एसडी स्पोर्ट्स इंडिया के सह-मालिक डेनियल शेंकर ने भी हरियाणा में इस पहल के विस्तार पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि सिर्फ एक कार्यक्रम आयोजित करना ही मकसद नहीं है, बल्कि बच्चों को नियमित रूप से एथलेटिक्स में हिस्सा लेने के अवसर देना जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हरियाणा में इस पहल को लंबे समय तक जारी रखा जाएगा।
गौरतलब है कि 2023 में मुंबई से शुरू हुई इस पहल के तहत अब तक कई शहरों में बच्चों को खेलों से जोड़ा जा चुका है। तीसरे सत्र में अब तक 250,000 बच्चे इसमें हिस्सा ले चुके हैं। मुंबई के बाद यह कार्यक्रम पुणे, हैदराबाद, चेन्नई और अहमदाबाद तक पहुंचा है। अब हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर के जुड़ने से इसका दायरा और बढ़ेगा। इस पहल का लक्ष्य बच्चों को शुरुआती उम्र से खेलों का अनुभव देना और भारत में मजबूत खेल संस्कृति तैयार करना है।