By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 23, 2026
(शिरीष बी प्रधान) काठमांडू, 23 अक्टूबर विदेश मंत्री एस. जयशंकर और नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले ने बदलती वैश्विक व्यवस्था के बीच अंतरराष्ट्रीय सहयोग के भविष्य पर विचारों का आदान-प्रदान किया। नेपाल की ‘नेशनल न्यूज एजेंसी’ के अनुसार बृहस्पतिवार को ‘एनडीटीवी वर्ल्ड समिट 2026’ के एक सत्र में दोनों नेताओं ने वैश्विक व्यवस्था में बदलाव, बहुपक्षीय सहयोग के भविष्य और क्षेत्रीय तथा उप-क्षेत्रीय साझेदारियों की आवश्यकता पर चर्चा की। सम्मेलन के ‘संप्रभु विकल्प की भू-राजनीति’ शीर्षक वाले सत्र में जयशंकर मुख्य वक्ता थे।
जयशंकर ने कहा कि औपचारिक संस्थागत ढांचे तैयार करने में परामर्श, प्रशासनिक प्रक्रियाओं, वित्तीय प्रतिबद्धताओं और नियम बनाने में काफी समय लग सकता है। उन्होंने कहा कि जहां औपचारिक ढांचे जरूरी हैं, वहां ऐसी व्यवस्थाएं उपयुक्त हैं, लेकिन सहयोग के सभी रूपों को संस्थागत ढांचों से जोड़ना आवश्यक नहीं है। ब्रिक्स की तुलना शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) से करते हुए जयशंकर ने कहा कि ब्रिक्स का अपना कोई सचिवालय नहीं है और न ही यह अपने सभी सदस्य देशों द्वारा हस्ताक्षरित किसी चार्टर पर आधारित है।
विदेश मंत्री ने ब्रिक्स और एससीओ के बीच संरचनात्मक अंतर को रेखांकित करते हुए कहा कि सहयोग के सभी तंत्रों के लिए एक ही तरह का समान ढांचा होना जरूरी नहीं है। जयशंकर ने कहा, ‘‘अगर आप मुझसे इस रुझान के बारे में पूछें, तो मैं कहूंगा कि यह स्पष्ट रूप से तदर्थ व्यवस्थाओं और समान विचारधारा वाले देशों के बीच साझेदारी की ओर बढ़ रहा है।’’ पिछले एक दशक में भारत द्वारा ऐसे लगभग 50 समूह बनाये जाने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इनमें त्रिपक्षीय और चतुष्पक्षीय व्यवस्थाओं से लेकर समान विचारधारा वाले देशों के गठबंधन तक शामिल हैं। उन्होंने कहा कि देशों में सहयोग के ऐसे मॉडल में रुचि बढ़ रही है, जिसमें प्रशासनिक खर्च कम हो और ठोस परिणाम हासिल किए जा सकें।
इससे पहले, वागले ने 26 अगस्त को भोटेकोशी-त्रिशूली नदी में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद आपदा से निपटने के प्रयासों में नेपाल को भारत की ओर से दिए गए सहयोग की सराहना की। उन्होंने कहा कि आपदा के कुछ ही घंटों के भीतर तत्काल सहायता उपलब्ध कराने के लिए नेपाल भारत का आभारी है।