By अभिनय आकाश | Jan 01, 2026
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र से भारत-पाकिस्तान गतिरोध में बीजिंग की मध्यस्थता के दावे का खंडन करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि पड़ोसी देश के साथ संबंधों में सामान्यता संप्रभुता की कीमत पर नहीं हो सकती। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा बार-बार यह दावा करने के बाद कि वाशिंगटन ने भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित युद्ध को रोका, चीन ने भी मई 2025 में चार दिनों तक चले संघर्ष के दौरान तनाव कम करने में अपनी भूमिका का दावा किया। कई पोस्टों में ओवैसी ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह नागरिकों को आश्वस्त करे कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच किसी तीसरे पक्ष का हस्तक्षेप नहीं हुआ।
उन्होंने कहा कि चीन भारत और पाकिस्तान को एक ही स्तर पर रखना चाहता है और दक्षिण एशिया में खुद को श्रेष्ठ साबित करने की कोशिश कर रहा है। क्या प्रधानमंत्री की चीन यात्रा के दौरान मोदी सरकार ने इसी बात पर सहमति जताई थी? एक तरफ चीन पाकिस्तान को 81 प्रतिशत हथियार मुहैया कराता है और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वास्तविक समय की खुफिया जानकारी प्रदान करता है, वहीं दूसरी तरफ वह मध्यस्थ होने का दावा करता है। यह अस्वीकार्य है और एक देश के रूप में हम इसे चुपचाप सहन नहीं कर सकते। चीन के दावों ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। बुधवार को कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने भी केंद्र सरकार पर तीखा हमला करते हुए इसे नई दिल्ली की राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ एक “मजाक” बताया।