By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Aug 12, 2022
नयी दिल्ली। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कहा कि सहकारी समितियों के जरिये 10 लाख करोड़ रुपये का कृषि-ऋण मुहैया कराने के लिए देश भर में दो लाख से अधिक नई प्राथमिक कृषि ऋण सहकारी समितियों (पैक्स) के गठन की जरूरत है। शाह ने यहां ग्रामीण सहकारी बैंकों के एक राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि देश में फिलहाल 95,000 से अधिक पैक्स समितियां मौजूद हैं लेकिन उनमें से करीब 63,000 समितियां ही सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि पैक्स समितियां कृषि क्षेत्र की कर्ज प्रणाली की आत्मा हैं लिहाजा उनका सशक्तीकरण और विस्तार जरूरी है। मंत्री ने कहा कि देश भर में तीन लाख पंचायतें मौजूद हैं लेकिन पैक्स समितियों की संख्या सिर्फ 95,000 ही है।
शाह ने पैक्स समितियों को अपने फलक का विस्तार करने और अधिक संख्या में किसानों को अपने साथ जोड़ने का सुझाव भी दिया। उन्होंने कहा कि सहकारिता मंत्रालय ने पैक्स समितियों के मानक नियमों का एक मसौदा जारी कर राज्य सरकारों एवं अन्य संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार इन सुझावों के आधार पर जल्द ही नियमों को अंतिम रूप देगी। मानक नियमों के मसौदे में पैक्स समितियों को पेट्रोलियम उत्पादों का वितरक बनने और राशन की सरकारी दुकानों के संचालन का काम सौंपने का भी प्रस्ताव रखा गया है। उन्होंने कहा कि इस मसौदे में 22 नए कार्यों से जुड़ने की मंजूरी देने की बात कही गई है। सहकारिता मंत्री ने कहा कि सरकार एक नई सहकारिता नीति लाने, एक विश्वविद्यालय के गठन और सहकारी समितियों का डेटाबेस तैयार करने की दिशा में भी काम कर रही है। इस मौके पर शाह ने चुनिंदा एससीबीएस, डीसीसीबी और पैक्स समितियों को पुरस्कार भी प्रदान किए। इसके अलावा 100 साल की सेवा पूरी कर चुके कुछ सहकारी ऋण संस्थाों को सम्मानित भी किया गया। इस कार्यक्रम में सहकारिता राज्य मंत्री बी एल वर्मा, सहकारिता सचिव ज्ञानेश कुमार, राज्य सहकारी बैंकों के राष्ट्रीय महासंघ (नैफ्सकॉब) को चेयरमैन कोंडुरु रविंदर राव, कृभको के चेयरमैन चंद्रपाल सिंह यादव और नैफेड के चेयरमैन बिजेंदर सिंह भी मौजूद थे।