पाक सेना को है अब नवाज शरीफ की जरूरत, पूर्व PM की वतन वापसी के बाद इमरान की होगी विदाई?

By अभिनय आकाश | Nov 16, 2021

ये तो हर कोई जानता है कि इमरान खान को प्रधानमंत्री बनाने के पीछे वहां की खुफिया एजेंसी आईएसआई और पाक सेना का हाथ है। लेकिन अब वहीं सेना पाकिस्तान के पूर्व पीएम नवाज शरीफ के साथ खड़ी नजर आ रही है। मीडिया रिपोर्ट की माने तो पाकिस्‍तान की सेना ने पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को देश लौटने का संकेत दिया है। ऐसा पाकिस्तानी सेना और इमरान खान के बीच तकरार की खबरों के बीच सामने आ रहा है। जिसके बाद कहा जा रहा है कि इमरान खान को बाहर का रास्ता दिखाने की योजना है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पाक सेना की तरफ से नवाज शरीफ को पाकिस्तान लौटने के लिए कहा गया है। सीएनएन-न्यूज 18 की रिपोर्ट के अनुसार नवाज शरीफ को कहा गया कि उनकी पाकिस्तान में जरूरत है और उन्हें वापस आना चाहिए।

इमरान और सेना में तकरार

इमरान खान की सबसे नई दुश्मनी पाकिस्तानी जनरल कमर जावेद बाजवा से हुई है। प्रधानमंत्री इमरान खान ने तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान के प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग करने का आदेश पाकिस्तानी आर्मी चीफ को दिया। लेकिन बाजवा ने साफ कर दिया कि वो तहरीक-ए-लब्बैक के खिलाफ बल का प्रयोग नहीं करेंगे। बता दें कि तहरीक-ए-लब्बैक इमरान के लिए गले का कांटा बन गई है। जैसे ही इस संगठन ने इस्लामाबाद कूच किया इमरान सरकार की धड़कने तेज हो गई। आनन-फानन में रेंजर्स को तैनात किया गया लेकिन वो भी इन्हें रोकने में नाकामयाब नजर आने लगे। तब इमरान ने आर्मी चीफ बाजवा से मुलाकात कर तहरीक-ए-लब्बैक के खिलाफ एक्शन लेने की बात कही। लेकिन बाजवा ने इससे साफ इनकार कर दिया।

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नवाज को जेल में रखने का दवाब

2018 में हुए आम चुनाव में इमरान खान कैसे प्रधानमंत्री बने इसे लेकर एक रिपोर्ट सामने आई है। पाकिस्तान की मीडिया में आई ये रिपोर्ट बताने के लिए काफी है कि वहां की न्यायपालिका कितनी करप्ट है। जो रिपोर्ट सामने आई है वो पूर्व पीएम नवाज शरीफ और उनकी बेटी मरियम नवाज से जुड़ी है। गिलगिट बाल्टिस्तान के पूर्व जज राणा एम शमीम ने अपने एक शपथ पत्र में कहा है कि उनपर पंजाब हाइकोर्ट से इस बात का दवाब बनाया गया कि नवाज और उनकी बेटी मरियम किसी भी हाल में 25 जुलाई 2018 के आम चुनाव से पहले जेल से बाहर न आ पाए। दरअसल भ्रष्टाचार के मामले में दोषी ठहराए गए नवाज शरीफ ने हाइकोर्ट में जमानत के लिए अर्जी लगाई है। भ्रष्ट जज की वजह से सुनवाई आम चुनाव के बाद हुई।  अब पूर्व जज की तरह में हलफनामा भी दाखिल किया गया है। कहा जा रहा  है कि ये हलफनामा भी सेना की अनुमति लेकर ही दाखिल किया गया है।

गौरतलब है कि भ्रष्टाचार के दो मामलों-एवेनफील्ड संपत्तियों और अल-अजीजिया स्टील मिल्स में दोषी ठहराए गए शरीफ को दिसंबर 2019 में इस्लामाबाद उच्च न्यायालय द्वारा भगोड़ा घोषित किया गया था, क्योंकि वह इस संबंध में इसके सामने पेश होने में विफल रहे थे। पाकिस्तान की एक जवाबदेही अदालत ने 2018 में शरीफ को आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति रखने के लिए 10 साल और जांच में सहयोग नहीं करने के लिए एक साल की सजा सुनाई थी।

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