By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Jun 16, 2020
वाशिंगटन। अमेरिका की एक आधिकारिक रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान वित्तीय पारदर्शिता की न्यूनतम आवश्यकता को पूरा नहीं करता।इसमें आरोप लगाया गया है कि पाकिस्तान सरकारी रिण गारंटी दायित्वों के बारे में पर्याप्त रूप से खुलासा नहीं करता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 60 अरब डालर की चीन- पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) परियोजना के तहत सरकारी उद्यमों को दिये जाने वाले वित्तपोषण के बारे में भी स्पष्ट खुलासा नहीं किया गया है। सीपीईसी चीन- पाकिस्तान की एक महत्वकांक्षी योजना है जिसमें सड़कों, रेलवे और बिजली परियोजनाओं का योजनाबद्ध नेटवर्क खड़ा किया जाना है। इसके तहत चीन के संसाधन संपन्न शिनजियांग ऊघुर स्वायतशासी क्षेत्र को पाकिस्तान के रणनीतिक रूप से अहम ग्वादर बंदरगाह से जोड़ा जायेगा।पाकिस्तान का यह बंदरगाह अरब सागर में है। चीन के राष्ट्रपति शी चिनपिंग 2015 में जब पाकिस्तान की यात्रा पर गये थे तब इस परियोजना की शुरुआत हुई थी।यह शी के अरबों डालर की महत्वकांक्षी परियोजना बेल्ट एवं सड़क पहल (बीआरआई) का अहम हिस्सा है।
हालांकि, इन 65 में से 14 सरकारों ने इस दिशा में अहम शुरुआत की हे।’’ इसमें कहा गया है कि समीक्षा अवधि के दौरान पाकिस्तान सरकार ने अपने बजट प्रस्तावों, बजट और वर्षांत रिपोर्ट को आम जनता के लिये उपलब्ध कराया। यह आनलाइन भी उपलब्ध है लेकिन इसमें पाकिस्तान सरकार केरिण दायित्वों के बारे में सीमित जानकारी ही दी गई है।रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘सरकार ने चीन - पाकिस्तान आर्थिक गलियारा परियोजना में सरकारी उद्यमों को दी गई रिण गारंटी दायित्वों के साथ ही अन्य सभी सरकारी और सरकारी गारंटी वाले रिण दायित्वों के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं दी है।’’ अमेरिका सीपीईसी परियोजना की आलोचना करता रहा है। उसका कहना है कि इसमें कोई पारदर्शिता नहीं बरती गई है। विश्व बैंक ने जिन कंपनियों को काली सूची में डाला है उन कंपनियों को इसमें ठेके दिये गये हैं। इससे देश (पाकिसतान) का रिण बोझ बढ़ेगा।हालांकि, पाकिस्तान ने अमेरिका की इस आलोचना को खारिज करते हुये कहा है कि इस परियोजना से नकदी संकट से जूझ रहे पाकिस्तान को ऊर्जा, अवसंरचना, औद्योगीकरण और रोजगार सृजन के क्षेत्र में व्याप्त खाई को पाटने में मदद मिली है। परियोजना के तहत कुछ प्रोजैक्ट पूरे हो चुके हैं जबकि कुछ अन्य में देरी हो रही है क्योंकि पाकिसतान और चीन परियोजना को लेकर परिचालन और वित्तपोषण ब्योरे पर काम कर रहे हैं।