IAF तो बड़ा खिलाड़ी निकला, पाक वायु सेना जिसे राफेल समझ टारगेट कर खुश होती रही वो था X-गार्ड, अमेरिकी पायलट ने खोली पोल

By अभिनय आकाश | Jul 09, 2025

ऑपरेशन सिंदूर को लेकर अमेरिका की वायुसेना के पूर्व पायलट की तरफ से भारत का लोहा माना गया है। इसके साथ ही पूर्व अमेरिकी पायलट ने तो यहां तक कह दिया कि जो कारनामा ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायु सेना ने करके दिखाया है। इससे पहले ऐसा कारनामा पहले कभी नहीं देखा गया। इस वक्त पूरी दुनिया के रक्षा विशेषज्ञ ऑपरेशन सिंदूर की स्टडी करने में लगे हुए हैं। ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत 7 मई को हुई थी और इस ऑपरेशन को 10 मई को रोक दिया गया था। इस ऑपरेशन के दौरान भारत की वायु सेना ने जो क्षमता दिखाया था उसे देख अमेरिका के पूर्व पायलट की तरफ से कहा गया कि ये अब तक का सबसे बेहतरीन स्पूफिंग और डिसेप्शन (भ्रम और धोखा) है। यानी जो कारनामा भारतीय वायुसेना ने कर दिखाया। ऐसा अब तक किसी भी देश की वायु सेना ने नहीं करके दिखाया है। 

भारत ने पाकिस्तान को कैसे बेवकूफ बनाया

अमेरिकी वायु सेना के पायलट रयान बोडेनहाइमर ने IDRW.org को दिए एक साक्षात्कार में बताया कि कैसे भारत ने राफेल एक्स-गार्ड का इस्तेमाल करके पाकिस्तान को छकाया। बोडेनहाइमर ने कहा कि भारत की रणनीति ने पाकिस्तान की चीन निर्मित PL-15E हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों और J-10C लड़ाकू विमानों को पूरी तरह से चकमा दे दिया। PL-15E मिसाइल, जो चीन के PL-15 का एक संस्करण है, इस छलावे का विरोध नहीं कर सकी। X-गार्ड ने पाकिस्तान के J-10C लड़ाकू विमानों पर लगे KLJ-7A AESA रडार को भी यह सोचकर गुमराह किया कि उन्होंने राफेल विमानों को निशाना बनाया है। बोडेनहाइमर ने कहा कि इस मिशन ने इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के नियमों को फिर से परिभाषित किया होगा। जेन्स डिफेंस वीकली ने कहा कि राफेल जेट को मार गिराने के कुछ पाकिस्तानी दावे वास्तव में इन एक्स-गार्ड को लेकर ही किए गए हैं। इस ऑपरेशन में भारतीय वायु सेना की इलेक्ट्रॉनिक युद्ध तकनीकों ने पाकिस्तान वायुसेना को पूरी तरह भ्रमित कर दिया।

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डसॉल्ट और रक्षा सचिव ने क्या कहा

डसॉल्ट के सीईओ ट्रैपियर ने एक रक्षा वेबसाइट को दिए साक्षात्कार में कहा कि भारत ने अपना एक राफेल विमान खो दिया है। हालाँकि, उन्होंने यह भी कहा कि यह ऊँचाई पर तकनीकी खराबी के कारण हुआ। फ्रांसीसी रक्षा वेबसाइट एवियन डी चेस ने ट्रैपर के हवाले से कहा कि यह घटना "एक विस्तारित प्रशिक्षण अभियान के दौरान 12,000 मीटर से अधिक की ऊँचाई पर" हुई। कंपनी ने बाद में स्पष्ट किया कि ट्रैपियर ने ऑपरेशन सिंदूर में राफेल के उपयोग के संबंध में कोई परिचालन या तकनीकी टिप्पणी नहीं की है।

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