संयुक्त राष्ट्र में नई चालें चलने जा रहा है Pakistan, Trump से मिलेंगे Shehbaz Sharif और Asim Munir

By नीरज कुमार दुबे | Sep 17, 2025

संयुक्त राष्ट्र महासभा का वार्षिक अधिवेशन हमेशा से कूटनीति और शक्ति-समीकरण का मंच रहा है। इस बार दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेनाध्यक्ष असीम मुनीर की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात तय है। मुनीर पहले भी ट्रंप से लंच मीटिंग कर चुके हैं, इसलिए यह दोनों के बीच दूसरी सीधी भेंट होगी। पाकिस्तानी प्रतिष्ठान के लिए यह अवसर न केवल अमेरिका के साथ रिश्तों को “रीसेट” करने का होगा, बल्कि भारत-केन्द्रित अपनी रणनीति को भी नए सिरे से गढ़ने का प्रयास होगा।

इसे भी पढ़ें: PM मोदी के जन्मदिन पर ये क्या बोल गया रूस, पूरी दुनिया हैरान

इस बीच, पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार के हालिया बयान ने एक अहम सच्चाई पर मुहर लगा दी है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि भारत-पाकिस्तान के बीच कोई भी मसला द्विपक्षीय है और भारत किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार नहीं करता। यह वही रुख है जिसे भारत दशकों से दोहराता रहा है। हम आपको याद दिला दें कि हाल ही में ट्रंप ने कई बार दावा किया था कि उन्होंने भारत-पाक के बीच युद्धविराम कराया, लेकिन अब पाकिस्तान स्वयं कह रहा है कि ऐसे दावों की कोई वास्तविकता नहीं है। दरअसल, यह भारत की कूटनीतिक दृढ़ता की जीत है और पाकिस्तान की मजबूरी का भी संकेत है।

दूसरी ओर, जैश-ए-मोहम्मद के कमांडर का यह स्वीकारना कि भारतीय मिसाइल हमलों में मसूद अजहर का परिवार “टुकड़े-टुकड़े” हो गया, भारत की सुरक्षा क्षमता और राजनीतिक इच्छाशक्ति का सीधा प्रमाण है। ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान के भीतर आतंकी ढांचे को गहरी चोट पहुंचाई और आतंकी समूह अब खुलकर अपनी हानि स्वीकारने को मजबूर हैं। यह संदेश सिर्फ पाकिस्तान के भीतर नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बिरादरी को भी गया है कि भारत अब केवल रक्षात्मक राष्ट्र नहीं है, बल्कि निर्णायक और दंडात्मक कार्रवाई करने में सक्षम है।

देखा जाये तो इन घटनाओं के संयोजन से तीन स्पष्ट निष्कर्ष निकलते हैं— पहला, पाकिस्तान अमेरिका की शरण लेकर अपनी रणनीतिक प्रासंगिकता बनाए रखना चाहता है; दूसरा, भारत की यह स्थिति अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्य है कि द्विपक्षीय मुद्दों में किसी तीसरे की गुंजाइश नहीं; और तीसरा, भारत की सैन्य कार्रवाई ने यह साबित कर दिया है कि आतंकवाद के ठिकाने अब कहीं भी सुरक्षित नहीं रहे। इन सबके बीच मोदी सरकार की नीति का मूल संदेश यही है कि भारत न तो तीसरे पक्ष के दबाव को स्वीकार करेगा और न ही आतंकवादियों को बख्शेगा।

-नीरज कुमार दुबे

प्रमुख खबरें

फिटनेस बनी Carlos Alcaraz की राह में रोड़ा, Cincinnati Masters के बाद अब US Open पर भी संकट के बादल

FIFA President Infantino की बढ़ी मुश्किल, निवेश प्रस्ताव वापसी के बावजूद UEFA का अविश्वास और Legal Action की तैयारी

Chess Olympiad: दिग्गज Harika Dronavalli टीम से बाहर, 19 वर्षीय Savitha Shri को मिला Team India में मौका

US Migration Policy: ट्रंप ने रद्द किए हजारों प्रवासियों के लाइसेंस, Freedom Hall पहल से बढ़ी हलचल