By अभिनय आकाश | Jul 24, 2025
पाकिस्तान ने भारत से बातचीत की पेशकश की है। प्रधानमंत्री शहबाद शरीफ का कहना है कि वो बातचीत के लिए तैयार हैं। गंभीर और सार्थक बातचीत के लिए हम तैयार हैं। ब्रिटिश उच्चायुक्त के साथ बातचीत में शहबाज शरीफ ने ये इच्छा जताई है। दरअसल, भारत की ओर साफ कहा गया है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को बढ़ावा देता रहेगा, तब तक कोई बातचीत नहीं होगी। ऐसे में पाकिस्तान हर मंच से भारत के साथ बातचीत करने की इच्छा जता रहा है। नई दिल्ली, इस्लामाबाद की ओर से इस तरह के शांति प्रस्तावों को एक घिसी-पिटी पटकथा का हिस्सा मानता है, जिसके बाद ऐतिहासिक रूप से विश्वासघात और शत्रुतापूर्ण कार्रवाइयाँ होती रही हैं।
पाकिस्तान के नेतृत्व का सार्वजनिक रूप से शांति की पेशकश करने का एक लम्बा इतिहास रहा है, जबकि वह शांति के विचार को ही नुकसान पहुंचाने वाली कार्रवाइयों को अनुमति देता है या उनका आयोजन करता है।
1999 कारगिल युद्ध: तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा नवाज़ शरीफ़ के साथ एक अभूतपूर्व शांति पहल के तहत लाहौर की यात्रा के कुछ ही महीनों बाद, जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ के नेतृत्व में पाकिस्तानी सैनिकों और आतंकवादियों ने कारगिल में भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ की, जिससे एक खूनी संघर्ष छिड़ गया जिसमें सैकड़ों लोगों की जान चली गई।
2001 आगरा शिखर सम्मेलन: कारगिल विश्वासघात के बाद, भारत ने सावधानीपूर्वक बातचीत फिर से शुरू की। लेकिन शिखर सम्मेलन विफल हो गया और उसी वर्ष दिसंबर में, पाकिस्तान से आए आतंकवादियों ने भारतीय संसद पर हमला किया, जिससे दोनों देश लगभग युद्ध के कगार पर पहुँच गए।
2008 मुंबई हमले: वर्षों की गुप्त कूटनीति और विश्वास-निर्माण के उपायों के बाद एक और बड़ा झटका लगा। पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा के गुर्गों द्वारा किए गए 26/11 के हमलों में 166 लोग मारे गए और बचा-खुचा विश्वास भी चकनाचूर हो गया।