कश्मीर का सपना देखना छोड़ कर अपने लोगों की चिंता करे पाकिस्तान

By डॉ. वेदप्रताप वैदिक | Sep 18, 2021

पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र मानव अधिकार परिषद और ‘इस्लामी सहयोग संगठन’ (आईआईसी) में कश्मीर का मुद्दा फिर से उठा दिया है। पाक प्रवक्ता ने यह नहीं बताया कि कश्मीर में मानव अधिकारों का उल्लंघन कहाँ-कहाँ और कैसे-कैसे हो रहा है? यदि वह अपनी बात प्रमाण सहित कहता तो न सिर्फ भारत सरकार उस पर ध्यान देने को मजबूर होती बल्कि भारत में ऐसे कई संगठन और श्रेष्ठ व्यक्ति हैं, जो मानव अधिकारों के हर उल्लंघन के खिलाफ निडरतापूर्वक मोर्चा लेने को तैयार हैं। इस समय कश्मीर के लगभग सभी नजरबंद नेताओं को मुक्त कर दिया गया है। यह ठीक है कि उन्हें कई महीनों तक नजरबंद रहना पड़ा है, जो कि अच्छी बात नहीं है लेकिन कोई बताए कि उन्हें सुरक्षित रखना भी जरूरी था या नहीं? 

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क्या जिन्ना ने पाकिस्तान इसीलिए बनवाया था? जरूरी यह है कि वह कश्मीर को आजादी दिलाने के पहले खुद आजाद होकर दिखाए। यदि वह अपने नागरिकों के मानव अधिकारों की रक्षा कर रहा होता तो वह इस्लामी जगत ही नहीं, सारी दुनिया का सितारा बन जाता लेकिन उसके हजारा, पठानों, सिंधुओं, बलूचों, हिंदुओं, सिखों और शियाओं की हालत क्या है? खुद प्रधानमंत्री इमरान खान और विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी उस पर कई बार अफसोस जाहिर कर चुके हैं। पाकिस्तान की जनता और सरकार पहले खुद अपने मानवों के अधिकारों की रक्षा करके दिखाए, तब उन्हें भारत या किन्हीं देशों के बारे में बोलने का अधिकार अपने आप मिलेगा। जहाँ तक ‘इस्लामी सहयोग संगठन’ का सवाल है, उससे तो मैं इतना ही कहूँगा कि वह पाकिस्तान का सहयोग सबसे ज्यादा करे। उसे अमेरिका और चीन-जैसे देशों के आगे झोली पसारने के लिए मजबूर न होने दे। उसे युद्ध और आतंकवाद में फंसने से बचाए। इस्लाम के नाम पर बना वह दुनिया का एक मात्र देश है। उसे वह ऐसा देश क्यों न बनाए कि सारी दुनिया उस पर और इस्लाम पर नाज़ करे?

-डॉ. वेदप्रताप वैदिक

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