By अभिनय आकाश | Jul 09, 2025
ऑपरेशन सिंदूर के कुछ सप्ताह बाद भी पाकिस्तान की नौसेना अपने ही समुद्र से गायब है। पाक नौसेना आज पूरी तरह से अस्त-व्यस्त है, जो खस्ताहाल युद्धपोतों, विफल चीनी तकनीक, खोखली पनडुब्बी शाखा और गिरते मनोबल से ग्रसित नजर आ रही है। जब भारत की नौसेना अटैकिंग मोड में नजर आया और गहरे समुद्र में निगरानी करने तक का पूरा प्रभुत्व दिखाया, तब पाकिस्तान का नौसैनिक बेड़ा दूर दूर तक नजर नहीं आया।
इस संकट की जड़ में पाकिस्तान का खस्ताहाल बेड़ा है। उसकी नौसेना की रीढ़ अभी भी 1990 के दशक में हासिल किए गए ब्रिटिश मूल के टाइप-21 फ्रिगेट हैं। अपनी सेवा अवधि से बहुत पहले ही ये जहाज अब लगातार महंगे रखरखाव की मांग करते हैं और इनके स्पेयर पार्ट्स या तो अनुपलब्ध हैं या पुराने हो चुके हैं। इसके अलावा, 2021 और 2023 के बीच वितरित किए गए नए चीनी टाइप-054A फ्रिगेट भी हैं, जिन्हें पाकिस्तान के नौसैनिक आधुनिकीकरण का प्रतीक माना जाता था। लेकिन वे भी रडार की गड़बड़ियों, प्रणोदन विफलताओं और न ठीक हो सकने वाली खामियों से ग्रस्त होकर सूखी गोदी में वापस आ गए हैं। कराची शिपयार्ड, जो पहले से ही बोझ तले दबा हुआ है, के पास इनकी मरम्मत के लिए डायग्नोस्टिक सिस्टम या सॉफ्टवेयर का अभाव है। चीनी इंजीनियरों को शामिल करने के प्रयास लागत और तकनीकी हस्तांतरण के मुद्दों के कारण रुक गए हैं। नतीजा? गश्त के लिए बनाए गए जहाज अब घाटों की शोभा बढ़ा रहे हैं। भारत के ऑपरेशन सिंदूर के बाद से इनमें से एक भी चीनी फ्रिगेट सक्रिय अभियानों में नहीं रहा है।