Pakistan को आटे-दाल-तेल के लाले पड़े हैं और उसके प्रधानमंत्री भारत को धमकी दे रहे हैं, इसे कहते हैं- रस्सी जल गयी पर बल नहीं गया

By नीरज कुमार दुबे | Feb 07, 2023

एक कहावत है रस्सी जल गयी पर बल नहीं गया। पाकिस्तान पर यह कहावत एकदम सटीक बैठती है क्योंकि पूरी तरह कंगाल हो चुके पाकिस्तान का उसके पाले हुए मुजाहिदीन ही बम धमाके करके बैंड बजा रहे हैं, टीटीपी जैसे संगठनों के आगे पाकिस्तान की सरकार, पाकिस्तान की सेना और उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई की दाल नहीं गल पा रही है क्योंकि टीटीपी के आतंकी जहां चाह रहे हैं और जैसे चाह रहे हैं वैसे धमाके कर पाकिस्तानियों को जहन्नुम के टूर पैकेज पर भेज रहे हैं। पाकिस्तान के पास आटा नहीं है कि रोटी बना ले, पाकिस्तान के पास पैसे नहीं हैं कि पेट्रोल-डीजल बाहर से मंगा कर रोड़ पर खड़ी गाड़ियां कुछ आगे सरका ले लेकिन चाहत इनकी कश्मीर को पाने की है।

बहरहाल, बात शहबाज शरीफ की चेतावनी की करें तो आपको बता दें कि उन्होंने कहा है कि अगर भारत ने पाकिस्तान पर बुरी नजर डालने की हिमाकत की तो उनके परमाणु संपन्न देश के पास उसे पैरों तले कुचलने की ताकत है। हम आपको बता दें कि शहबाज शरीफ ने कश्मीरियों के प्रति समर्थन जताते हुए ‘कश्मीर एकता दिवस’ पर पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) की विधानसभा को संबोधित करते हुए उक्त टिप्पणियां कीं। इस दौरान शहबाज शरीफ ने कहा, ‘‘पाकिस्तान के पास परमाणु ताकत है और भारत हम पर बुरी नजर नहीं डाल सकता।''

हम आपको बता दें कि पाकिस्तान की ओर से परमाणु बम की धमकी ऐसे समय दी गयी है जब पिछले सप्ताह ही पाकिस्तानी संगठन तहरीक-ए-लब्बाक के नेता हाफिज साद रिज़वी ने शहबाज शरीफ सरकार को सलाह दी थी कि एक हाथ में कुरान और दूसरे हाथ में बम लेकर पैसे मांगो और कह दो कि पैसे दो नहीं तो ये बम फोड़ देंगे। उनके इस सुझाव पर पाकिस्तान सरकार ने गौर भी किया क्योंकि पाकिस्तान में जोरदार आर्थिक संकट चल रहा है। यह संकट इसलिए खड़ा हुआ क्योंकि अमेरिका ने डॉलर देने बंद कर दिये, चीन ने पाकिस्तान का फोन उठाना बंद कर दिया, मुस्लिम देशों ने पाकिस्तानी नेताओं के नंबर ब्लॉक कर दिये क्योंकि उधार दे देकर वह भी थक गये हैं। यही नहीं अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने भी पाकिस्तान को पैसे देने से मना कर दिया है। इसके अलावा पाकिस्तान में दो हफ्ते के लिए विदेशी मुद्रा भंडार बचा है जिसका मतलब है कि पाकिस्तान जो चीजें आयात करके खाता-पीता है वह बस दो हफ्ते तक ही अब उसका लाभ उठा सकता है। उसके बाद पाकिस्तान को कोई उधार खाने को भी नहीं देगा इसीलिए साद रिजवी ने अपने देश की सरकार को सलाह दी है कि बम दिखा कर पैसे मांगो।

शरीफ ने क्यों कही भड़काऊ बात?

शहबाज शरीफ के इस बयान के बारे में माना जा रहा है कि उन्होंने भारत के प्रति जहर इसलिए उगला क्योंकि इमरान खान की अगुवाई वाली पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसान ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में शहबाज शरीफ की पार्टी को शिकस्त दी थी। शहबाज शरीफ का यह बयान इसलिए भी आश्चर्यजनक है क्योंकि अभी पिछले महीने दुबई के एक चैनल को दिए साक्षात्कार में उन्होंने कहा था कि भारत के साथ तीन युद्ध के बाद पाकिस्तान ने सीख ले ली है और अब वह अपने पड़ोसी के साथ शांति चाहता है।

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शहबाज शरीफ के भाषण की बड़ी बातें

शहबाज शरीफ ने साथ ही कहा, ‘‘पाकिस्तान कश्मीर के मुद्दे पर नैतिक, कूटनीतिक और राजनीतिक समर्थन देता रहेगा।’’ पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) की विधानसभा के विशेष सत्र को मुजफ्फराबाद में संबोधित करते हुए शहबाज शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव के तहत हमेशा जम्मू-कश्मीर मुद्दे के शांतिपूर्ण समाधान पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि नस्लीय आधार पर पूर्वी तिमोर, दारफुर और दुनिया के अन्य इलाकों को आजादी दी गई, लेकिन वही आधार जम्मू-कश्मीर और फलस्तीन पर लागू नहीं किया गया। हम आपको बता दें कि शहबाज शरीफ ‘कश्मीर एकता दिवस’ के मौके पर बोल रहे थे जो पाकिस्तान कश्मीरियों के प्रति समर्थन व्यक्त करने के लिए मनाता है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अलग से जारी एक विशेष संदेश में कहा कि पाकिस्तान की जनता ''उनकी (कश्मीरियों) आत्मनिर्णय के अपरिहार्य अधिकार के लिए जारी न्योचित संघर्ष के प्रति अपनी प्रतिबद्धता और अपने समर्थन को दोहराती है।’’ 

पाक विदेश मंत्री और सेना ने भी कश्मीर राग अलापा

पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ने भी कहा कि जम्मू-कश्मीर विवाद पाकिस्तान की विदेश नीति का ‘अहम स्तंभ बना रहेगा।' उन्होंने कहा, ‘‘हम कश्मीरी लोगों का बिना शर्त नैतिक, कूटनीतिक और राजनीतिक समर्थन जारी रखेंगे।’’ पाकिस्तानी सेना के शीर्ष अधिकारियों ने भी कश्मीरियों की ‘संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव के तहत आत्मनिर्णय के अधिकार’ के लिए जारी संघर्ष के प्रति समर्थन व्यक्त किया। इसके अलावा इस्लामाबाद, मुजफ्फराबाद, गिलगित और चारों सूबों की राजधानियों में एकजुटता मार्च निकाला गया।

बहरहाल, पाकिस्तान के बारे में कहा जा सकता है कि जिस देश का प्रधानमंत्री खुद कहे कि उधार मांग-मांग कर अब शर्म महसूस होती है, जिस देश का प्रधानमंत्री अपने देश के आर्थिक और सुरक्षा के हालात को नहीं संभाल पा रहा हो उसका तो नैतिक अधिकार ही नहीं है कि वह किसी और देश के बारे में बात करे। जहां तक कश्मीरियों के अधिकार और हक की बात है तो पूरी दुनिया जानती और मानती है कि जम्मू-कश्मीर के लोग पहले से ज्यादा अधिकारों के साथ खुशहाली से रह रहे हैं और विकास के वह नये सोपान देख रहे हैं जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी।

-नीरज कुमार दुबे

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